जालंधर यहां बड़े डाकघर से 40 लाख लूटने वाले हसन और उसके 4 साथी पुलिस ने लुधियाना से दबोच लिए हैं। ये सभी झारखंड के हैं। हसन 12 सदस्यीय अंतरराज्जीय लुटेरे गिरोह का सरगना है। हालांकि रिकवरी न होने के कारण पुलिस मामले को सार्वजनिक करने से गुरेज कर रही है। हसन की गिरफ्तारी से नेहरु गार्डन रोड व मॉडल टाऊन में हुए लाखों रुपए के कंप्यूटर चोरी का केस भी ट्रेस हो गया है।
यह गैंग देश के प्रमुख शहरों में करीब 50 से ज्यादा वारदातें कर चुका है। पूरे मामले को ट्रेस करने में एसएसपी पवन राय का अहम योगदान रहा है। 6 नवंबर की रात रुपए लूटे गए थे।
ऐसे मिला सुराग
डाकघर, नेहरु गार्डन रोड पर कंप्यूटर शॉप में वारदातों के बाद पुलिस को वहां से कुछ सुराग मिले थे। लुटेरे डाकघर से चौकीदार अशोक कुमार और लेबर दर्शन कुमार का मोबाइल साथ ले गए थे। पुलिस ने इन मोबाइल फोनों के आईएमईआई नंबर पर ट्रैप लगाया हुआ था।
कुछ दिन पहले ही इनमें से एक मोबाइल फोन चल पड़ा और लुटेरों का कोरियर बना करिंदा पुलिस की गिरफ्त में आ गया।
टीम झारखंड में तो हसन लुधियाना
कोरियर के गिरफ्त में आने के बाद झारखंड जाकर जांच टीम ने सभी आरोपियों की पहचान कर ली थी। इन्हें पकड़ने के लिए एक विशेष टीम झारखंड भेजी गई थी। इस दौरान एसएसपी राय को सूचना मिली कि हसन और उसके साथ लुधियाना के एक होटल में ठहरें हुए हैं। पुलिस ने हसन और उसके तीन साथी राउंड-अप कर लिए। हालांकि प्राथमिक पूछताछ में हसन पुलिस को गच्च दे रहा है।
पेशेवर अपराधी हैं सभी आरोपी
हसन और उसके साथी कुख्यात अपराधी है। पूछताछ के दौरान आरोपी अपने जुबां नहीं खोल रहे थे। वीरवार को वीआईपी ड्यूटी में पुलिस व्यस्त होने के कारण उनसे पूछताछ भी नहीं हो सकी। हालांकि हसन डाकघर लूटकांड में अपना हाथ न होने की बात कह रहा है।
लेकिन पुलिस के हाथ आया कोरियर ने हसन की पोल खोल दी है। हसन और उसके साथी लुधियाना में बड़ी वारदात को अंजाम देने कुछ दिन पहले ही झारखंड से आए हुए थे। गैंग हर वारदात से पहले होमवर्क करता है। ऐसा ही उन्होंने डाकघर में वारदात से पहले किया था।
गैंग के सभी सदस्य रेलवे स्टेशन के निकट स्थित गैस्ट हाउस में छिपे थे। लुधियाना में वह लूट का मॉल ले गए और जाते समय कोरियर को ईनाम के तौर पर लूटा हुआ मोबाइल दे गए थे।