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Personal Finance Personal Finance बेंगलुरू. हर शुक्रवार को जब भी नई फिल्म थिएटर में आती है, गारमेंट व्यापारी राजू जैन घबराने लगते हैं। आप हैरान होंगे कि हर शुक्रवार को रिलीज होने वाली फिल्म का गारमेंट से क्या संबंध है?
क्या है वजह
वास्तव में सिनेमा देखने वालों की पसंद हर फिल्म के हिसाब से तेजी से बदल जाती है और यह वर्ग गारमेंट के ग्राहकों में बड़ी संख्या में है। इसलिए गारमेंट बनाने वालों और बेचने वालों को हर सप्ताह अपना स्टाक खत्म करना पड़ता है। जैसे आजकल बाजार में ‘रब ने बना दी जोड़ी’ और गजनी से कपड़ों की डिजाइनें ली जा रही हैं, वहीं महिलाओं के लिए फैशन और डेनियल क्रेग की ट्यूक्सडज, साथ ही जेम्स बांड की क्वांटम आफ सोलेस से काटन की शर्ट का दौर चल रहा है।
कैसे बदला फैशन
अभी कुछ सप्ताह पहले जोधा अकबर की तरह अनारकली शैली के सलवार सूट, जब वी मेट की तरह कुर्ता, दोस्ताना की तरह शर्ट और बचना ए हसीनों की तरह पैंट बाजार में दिखाई पड़ रहे थे। इससे स्थानीय गारमेंट उद्योग को काफी परेशानी हो रही है। कर्नाटक का गारमेंट उद्योग 2006-07 में करीब 8,000 करोड़ रुपए का था। बार्गेन शाप के राजू का कहना है कि गजनी, रब ने बना दी जोड़ी जैसी ब्लाक बस्टर फिल्म जैसे ही आ रही है, वैसे ही स्टाक का ढेर लग जाता है। स्टाक से मुक्ति पाने के लिए निर्माता भारी डिस्काउंट देता है। नवंबर-दिसंबर के स्टाक से मुक्ति पाने के लिए निर्माता जनवरी में काफी रियायतें देने में लगे रहते हैं।
डिजाइनर नहीं हैं
गारमेंट उद्योग पहले ही सस्ते चीनी कपड़ों के आयात से परेशान है। उद्योग जगत के प्रतिनिधियों का मानना है कि इस साल गारमेंट उद्योग की प्रगति दर 15 फीसदी रहेगी। कई निर्माताओं की परेशानी यह है कि उनके पास ज्यादा कुशल डिजाइनर नहीं हैं। उन्हें ऐसे दक्ष डिजाइनरों की जरूरत है, जो तेजी से परिवर्तनों को अपना सकें। बड़े निर्माता और रिटेलर ही अच्छे डिजाइनरों की सेवाएं लेने की स्थिति में हैं।