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मुंबई। माइक्रोसॉफ्ट के नए ऑपरेटिंग सिस्टम का पहला बीटा वर्जन विंडोज 7 पिछले साल 27 दिसंबर 2008 को आया था। तभी से इसने विश्लेषकों और टेक्नॉलिजी ब्लॉगर्स के बीच काफी दिलचस्पी पैदा की है। बीते एक सप्ताह से मौजूद टेस्ट वर्जन अलग-अलग फाइल शेयरिंग वेबसाइट पर उपलब्ध है जिस वजह से इसकी डाउनलोड संख्या में भारी बढ़ोतरी हुई है। सॉफ्टवेयर उद्योग के जानकारों के मुताबिक विंडोज 7 की पांच हजार से ज्यादा कंप्लीट कॉपी डाउनलोड की गई हैं।
विंडोज 7 को विडोंज विस्टा का बेहतर वर्जन बताया जा रहा है। इसमें पहले से बेहतर यूजर इंटरफेस (आसान कार्यप्रणाली)और मेमरी मैनेजमेंट का वादा किया गया है। साथ ही इसमें बूट-अप टाइम (स्टार्ट होने का वक्त) भी कम है यानी पहले के मुकाबले जल्दी डेस्कटॉप पर पहुंचेगा। माइक्रोसॉफ्ट द्वारा कहा जा रहा है कि यह ऑपरेटिंग सिस्टम विस्टा से 20 फीसदी तेज है और बूट-अप होने में 27 सेकंड का वक्त लेता है जो विंडोज एक्सपी के बराबर है। बाजार में उपलब्ध ऑपरेटिंग सिस्टम्स की तुलना में इसका शट डाउन टाइम भी कम है। यानी इसे तेज ऑपरेटिंग सिस्टम भी कहा जा सकता है।
कंप्यूटर यूजर को ऑपरेशंस में ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा क्योंकि फाइलों के डाउनलोड और ट्रांसफर होने का वक्त डुअल-कोर इंटेल प्रोसेसर पर काफी कम है, अन्य प्रोसेसर उपयोग करने पर वक्त कुछ ज्यादा लग सकता है। विस्टा और एक्सपी के मुकाबले विंडोज 7 पर एक जीबी(गीगाबाइट) की रैम (रैंडम एक्सेस मेमोरी) भी काफी तेजी से काम करती है। विश्लेषकों के मुताबिक विंडोज 7 को लेकर चिंता का विषय हार्डवेयर कम्पेटिबिलिटी है। विस्टा के साथ कुछ हार्डवेयर दिक्कतें भी थीं जिसमें इंस्टॉलेशन और ऑपरेटिंग सिस्टम की बढि़या फंक्शनिंग नहीं मिल पाती थी। एक विश्लेषक के मुताबिक नए फीचर्स के लिए हार्डवेयर वेंडर की ओर से सहयोग की जरूरत है। हालांकि इस बार उनका सहयोग इनके लिए ड्राइवर्स को रिराइट करने तक नहीं होगा।'
माइक्रोसॉफ्ट की वेबसाइट के मुताबिक ऑपरेट सिस्टम का बीटा वर्जन 13 जनवरी तक ही उपलब्ध हो पाएगा। माना जा रहा है कि माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ स्टीव बॉमर 7 जनवरी को लास वेगास में आयोजित हो रहे इंटरनेशनल सीईएस ट्रेड शो के उद्घाटन समारोह में विंडोज 7 को लेकर कुछ कह सकते हैं।