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बच्चे क्यों हो जाते हैं हिंसक

voilent child समाज में हिंसा लगातार बढ़ रही है और एक बात जो सबसे ज्यादा ठेस पहुंचाती है वह यह है बड़ी संख्या में बच्चों का इसमें लिप्त होना। आज का युवा वर्ग शायद अपनी बर्दाश्त करने की शक्ति खो रहा है। उसमें सहनशीलता कम हो रही है। आखिर बच्चों में होते इन नकारात्मक बदलावों के पीछे कौन जिम्मेदार है?

बात चाहें विदेश में किसी बच्चे द्वारा स्कूल में अपने ही साथी या माता-पिता को गोली मारने की हो या मुंबई हमले में शामिल युवा अपराधी कसब की। एक्सपर्ट्स के मुताबिक यदि जन्म से लेकर छह वर्ष की उम्र तक बच्चों के आसपास लड़ाई-झगड़े, गुस्सा, चिंता व तनाव का माहौल रहता है तो वे भी धीरे-धीरे हिंसक होने लगते हैं। इसके पीछे उनके दिमाग में होने वाले रासायनिक बदलाव जिम्मेदार होते हैं। बच्चे इस उम्र में जैसी घटनाएं अपने आसपास होते देखते हैं उनके व्यवहार में भी वैसा ही बदलाव आने लगता है।

यदि बच्चे के माता-पिता गर्भ धारण के दौरान नशे के आदी होते हैं तो इसका प्रभाव भी बच्चों पर पड़ता है। जो कि जन्म के बाद भी जारी रह सकता है। ऐसे बच्चे बड़े होकर भी हिंसक ही रहते हैं। छठवी वार्षिक वीडियो व कम्प्यूटर गेम्स रिपोर्ट के अनुसार 2-17 उम्र तक के लगभग 92 प्रतिशत बच्चे वीडियो गेम्स खेलते हैं जिनमें से 20 प्रतिशत बच्चों के ऊपर इसका गहरा प्रभाव पड़ता है। वीडियो गेम्स के किरदारों से बच्चे खुद को काफी गहराई से जोड़ लेते हैं और उनके द्वारा की जाने वाली हरकतों की नकल भी करते हैं। जरूरी है कि इस उम्र में बच्चों के व्यवहार पर नजर रखी जाए।

क्या हैं लक्षण

- बच्चों में अचानक मूड परिवर्तन होना।

- हिंसक व मार-धाड़ वाले खेलों के प्रति रुचि विकसित होना।

- बात-बात पर गुस्सा होना।

- आत्मविश्वास में कमी।

- किसी चीज के लिए अत्यधिक जिद करना।

- किसी काम को अच्छे से न कर पाना और पढ़ाई में मन न लगना।

- हम उम्र बच्चों से झगड़ा होना या जानवरों के प्रति हिंसक होना।

- दया व प्यार जैसे भावों की कमी होना।

- गलती करने के बावजूद गलती न मानना और बहस करना।

इनसे बचाएं

- हिंसक वीडियो गेम्स न देखने दें।

- कोई गलती करने पर बच्चे को डांटने या मारने की बजाए प्यार से समझाएं।

- उन्हें सही व गलत के बारे में बताएं।

- दया, करुणा व प्यार जैसे भावों के बारे में बताएं।

- खुद भी बच्चों के सामने लड़े-झगड़े नहीं और हिंसक प्रवृत्ति न अपनाएं।

- बच्चों में रोचक किताबें पढ़ने की आदत डालें।

- घर में बंदूक और ऐसे कोई हथियार न रखें जिससे बच्चे हिंसक हो सकते हैं।

- बच्चों की हरकतों और फ्रेंड सर्किल पर नजर रखें।





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