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शीशमहल में गजनी का हाथी

परदे के पीछे .‘गजनी’ की विराट व्यावसायिक सफलता के कारण फिल्म उद्योग के कर्णधारों की सोच में परिवर्तन आ रहा है। अप्रवासी भारतीय दर्शकों की डॉलर ताकत और देश में मल्टीप्लैक्स की आय के कारण अनेक फिल्मकार एकल ठाठिया सिनेमा और उसके दर्शकों की अवहेलना कर रहे थे।

कुछ फिल्मकारों को इतना दंभ था कि उनका दावा था कि वे बिहार और उत्तरप्रदेश के दर्शकों के लिए फिल्म नहीं बनाते। फिल्म उद्योग में ‘निच सिनेमा’ नामक मुहावरे का चलन था जिसका अर्थ था कि मल्टीप्लैक्स के दर्शकों की रुचि ही भारत की रुचि है।

‘गजनी’ ने मल्टी में अच्छा व्यवसाय करते हुए एकल ठाठिया और कस्बों के सिनेमा में भी भारी भीड़ जुटाई गोयाकि ‘गजनी’ पेरिस से पटना और न्यूयॉर्क से नवानगर तक सफल रही। पहले सफलता के पॉकेट्स मान लिए गए थे और भ्रामक प्रचार था कि अखिल भारतीय पसंद की फिल्म नहीं बनाई जा सकती।

‘गजनी’ ने इस तरह के पृथकतावादी विचारों को नेस्तोनाबूद कर दिया। नेताओं द्वारा किया गया भारत का तथाकथित विभाजन मनोरंजन क्षेत्र में अस्वीकार कर दिया गया।

यह हमेशा माना गया कि अप्रवासी भारतीय शादी-ब्याह और करवाचौथ की फिल्में ही पसंद करते हैं, क्योंकि एक्शन सिनेमा उन्हें अमेरिका में ही बना पसंद है। ‘गजनी’ की सफलता ने यह भ्रम भी तोड़ दिया है। विदेश क्षेत्र में शाहरुख के गढ़ में पहली सेंध अक्षय कुमार ने मारी थी और अब आमिर खान ने दीवारें ही तोड़ दी हैं।

सुपर सितारे सारा समय आपसी दोस्ती का स्वांग करते हैं परंतु गहरी प्रतिद्वंद्विता को कभी पूरी तरह छुपा नहीं पाते। शाहरुख से स्वयं को बड़ा सितारा साबित करने के लिए अक्षय कुमार ने ‘सिंह इज किंग’ बनाई थी और बार-बार प्रचारित किया जा रहा था कि उसका मेहनताना खान से अधिक है।

‘गजनी’ ने पहले सप्ताह में 110 करोड़ का ग्रॉस और चालीस करोड़ की नेट आय करके अक्षय और शाहरुख के होश उड़ा दिए हैं। पांच फीट आठ इंच का आमिर सबसे बड़ा सितारा सिद्ध हो गया है।

कितने अफसोस की बात है कि सलमान ने सबसे पहले कसरती बदन का उदाहरण प्रस्तुत किया था और आज गलत फिल्मों के चयन के कारण शिखर सितारों में उसकी गिनती ही नहीं होती। बोनी कपूर की सुपर एक्शन फिल्म ‘वांटेड’ के द्वारा सलमान अपना स्थान दोबारा हासिल कर सकता है।

ज्ञातव्य है कि ‘गजनी’ की तरह ‘वांटेड’ भी तमिल फिल्म का हिंदी संस्करण है। इसका यह अर्थ है कि डॉलर प्रभाव और अप्रवासी पसंद के आतंक से दक्षिण भारत मुक्त रहा है और गजनी तथा पोखरी (वांटेड) की तरह मसाला फिल्में बनाता रहा है। वहीं तथाकथित निच सिनेमा के मोह में फंसकर कमल हासन ने अपनी सितारा हैसियत गिरा ली है।

रजनीकांत ‘गजनी’ की तरह की फिल्में करते रहे हैं। दरअसल लंबे अरसे बाद ‘गजनी’ की तरह मारधाड़ वाली मसाला फिल्म आई है। ‘गजनी’ की तर्ज पर फिल्में रचने वालों को याद रखना चाहिए कि एक्शन फिल्म ‘गजनी’ का आधार उसकी मजबूत और मनोरंजक प्रेमकथा है।

बहरहाल ‘गजनी’ ने कई सितारों और फिल्मकारों की नींद हराम कर दी है। उनके कांच के महल में ‘गजनी’ नामक आम आदमी का मनोरंजन हाथी की तरह घुस गया है।





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