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क्या आयकर बचाने के लिए व्यक्ति को शादी कर लेनी चाहिए? यह सुनने में थोड़ा अजीब जरूर लग सकता है, लेकिन सच यही है कि अविवाहित की बनिस्बत एक विवाहित व्यक्ति कहीं अधिक कर बचा सकता है। भारतीय आयकर अधिनियम 1961 में ऐसे कई प्रावधान हैं जो एक शादीशुदा व्यक्ति को आयकर बचाने में मददगार होते हैं।
पृथक फाइल में फायदा
शादीशुदा व्यक्ति अपनी पत्नी की अलग से इनकम टैक्स फाइल बनवा सकता है। महिला होने के नाते आपकी पत्नी को उस पर एक लाख 80 हजार रुपए तक की आयकर छूट का फायदा मिलेगा। यही नहीं, आपकी पत्नी को बीमा प्रीमियम के भुगतान अथवा इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (ईएलएसएस) या पांच साल की एफडी इत्यादि में निवेश पर भी कर कटौती का लाभ मिल सकेगा। यह लाभ अधिकतम एक लाख रुपए तक का मिल सकता है। इस प्रकार यदि आपकी पत्नी की कुल आय 2 लाख 80 हजार रुपए है और उसमें से वह एक लाख रुपए का उपरोक्त साधनों में निवेश करती है तो इस आय पर आयकरशून्य होगा।
घर खरीदने में फायदा
यदि शादी के बाद आप होम लोन से कोई मकान खरीदते हैं तो उसे अपनी पत्नी के साथ संयुक्त रूप से खरीदने पर टैक्स बचत के रूप में काफी फायदा मिलेगा। याद रखें कि संयुक्त नाम से मकान खरीदने पर पति और पत्नी दोनों को ही आयकर अधिनियम की धारा 24 के तहत हाउसिंग लोन पर चुकाए जाने वाले ब्याज पर अलग-अलग डेढ़-डेढ़ लाख रुपए तक की कर-कटौती का लाभ मिलता है।
इस प्रकार शादीशुदा व्यक्ति एक ही संपत्ति पर हाउसिंग लोन पर चुकाए जाने वाले ब्याज की मद में तीन लाख रुपए तक की कर-छूट का दावा कर सकता है। इसी प्रकार धारा 80सी के तहत भी आपकी पत्नी होम लोन के भुगतान में अधिकतम एक लाख रुपए तक की कर-कटौती की हकदार बनेगी।
एचयूएफ का फायदा
शादी का एक फायदा यह भी है कि इससे आप अपना हिंदू अविभाजित परिवार (एचयूएफ) बनाकर आयकर बचाने का एक और रास्ता निकाल सकते हैं। आयकरदाताओं के बीच एक गलत अवधारणा यह व्याप्त है कि अब एचयूएफ की पृथक फाइल नहीं बनाई जा सकती अथवा एचयूएफ तब तक अस्तित्व में नहीं आ सकता जब तक कि आपका कोई बच्च न हो। लेकिन ये धारणाएं गलत हैं। शादी के तत्काल बाद ही आप एचयूएफ के रूप में नई स्वतंत्र इनकम टैक्स फाइल शुरू कर सकते हैं।
एचयूएफ की शुरुआत अपने रिश्तेदारों या मित्रों के उपहारों से की जा सकती है (हालांकि ध्यान रखें कि खुद या पत्नी अपने एचयूएफ को उपहार नहीं दें)। एचयूएफ के लिए आयकर छूट की सीमा डेढ़ लाख रुपए वार्षिक है। इसी प्रकार धारा 80सी के तहत एक लाख रुपए तक की पृथक कर कटौती का लाभ एचयूएफ के जरिये उठाया जा सकता है।
उपहार का फायदा
आयकर कानून के प्रावधान के मुताबिक किसी गैर रिश्तेदार से एक साल में अधिकतम 50 हजार रुपए तक का उपहार स्वीकार किया जा सकता है। इससे अधिक के उपहार को स्वीकारने पर अतिरिक्त राशि आपकी आय में जुड़ जाती है। लेकिन शादी के अवसर पर यह प्रावधान लागू नहीं होता है। उस मौके पर किसी गैर रिश्तेदार से हासिल 50 हजार रुपए से अधिक की राशि का उपहार भी आयकरमुक्त होगा।
फर्म में पार्टनरशिप
यदि आप व्यवसायी हैं तो शादी होते ही आप अपनी पत्नी को पार्टनरशिप फर्म में पार्टनर भी बना सकते हैं। इस पार्टनरशिप फर्म के लाभ के हिस्से में रूप में आपकी पत्नी को जो भी आय होगी, वह करमुक्त होगी। इसके अलावा आप अपनी फर्म में अपनी पत्नी को एक कर्मचारी की तरह वेतन भी दे सकते हैं। इस राशि को आपके व्यवसाय की आय में कर कटौती के रूप में दिखाया जा सकता है। हालांकि ऐसा तभी किया जा सकता है यदि आपकी पत्नी तकनीकी या व्यावसायिक रूप से दक्ष हो।
जब अकेले हंै..
* एक लाख 50 हजार रुपए तक की आय करमुक्त रहेगी।
* बीमा प्रीमियम का भुगतान, ईएलएस इत्यादि में अधिकतम एक लाख रुपए के निवेश पर कर-कटौती का लाभ।
* होम लोन के ब्याज के पुनभरुगतान पर सालाना अधिकतम एक लाख 50 हजार रुपए तक की कर-कटौती का लाभ।
* अपना अलग से एचयूएफ गठित नहीं कर सकते हैं।
जब एक से दो हो गए ..
* पत्नी की अलग से आयकर फाइल बनाने पर एक लाख 80 हजार रुपए की अतिरिक्त कर-छूट का लाभ मिलेगा। * पत्नी भी अलग से बीमा प्रीमियम इत्यादि में अधिकतम एक लाख रुपए तक के निवेश पर कर-कटौती का लाभ हासिल कर सकती है। * संयुक्त रूप से मकान खरीदने पर होम लोन के ब्याज के भुगतान पर अधिकतम तीन लाख रुपए तक की कर-कटौती का लाभ मिलेगा। * पृथक एचयूएफ का गठन करके कर-संबंधी सारे लाभ हासिल कर सकते हैं।
लेखक दिल्ली में निवासरत जाने-माने कर एवं निवेश विशेषज्ञ हैं।