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शर्माजी के पहले ही चार बैंकों में खाते थे। जब उन्हें डीमेट एकाउंट की जरूरत पड़ी तो एक और बैंक में खाता खुलवाना पड़ा क्योंकि डीमेट खोलने वाली संस्था का जिन बैंकों से टाई-अप था, उनमें से किसी में भी शर्माजी का खाता नहीं था। शर्माजी ऐसे अकेले शख्स नहीं हैं। हम-आपमें से कई लोग विभिन्न वजहों से नए-नए खाते खुलवाते जाते हैं। तीन खाते ही पर्याप्त1. मासिक आय-व्यय के लिए
आजकल प्रत्येक नौकरीपेशा व्यक्ति का वेतन सीधे उसके सेलेरी एकाउंट में जाता है। यह खाता उसकी कंपनी द्वारा निर्धारित बैंक में खोला जाता है। वेतन के अतिरिक्त डिविडेंड, पोस्ट ऑफिस मंथली इनकम स्कीम इत्यादि के जरिये मिलने वाले ब्याज आदि के लिए इसी खाते का इस्तेमाल करें। सभी नियमित खर्च जैसे लोन की मासिक किस्त (ईसीएस के जरिये), म्यूचुअल फंड की सिप या बीमा प्रीमियम का भुगतान इत्यादि भी इसी खाते से जोड़ दें। इस प्रकार मासिक आय व मासिक व्यय का हिसाब एक ही खाते में रहने से ज्यादा माथा-पच्ची नहीं रहेगी। 2. इमरजेंसी फंड के लिए एक खाता ऐसा रखें जिसमें इमरजेंसी के लिए पैसा रख सके। यह पैसा आपके वेतन में हुई बचत का एक हिस्सा हो सकता है या फिर आपको मिलने वाला बोनस या एरियर। यह खाता ऐसा हो जिसमें आप पैसा रखकर कुछ वक्त के लिए भूल सके। 3. डीमेट के लिए अगर आप शेयरों की ऑनलाइन ट्रेडिंग करना चाहते हैं तो उसके लिए भी एक ट्रेडिंग एकाउंट जरूरी होगा। यह उसी बैंक में खोला जाता है जिसके साथ डीमेट खोलने वाली संस्था का टाई-अप होता है। इसे अलग ही रखें ताकि आपके शेयरों की खरीद-बिक्री का हिसाब बिल्कुल साफ रहें। क्या दिक्कतें?
* सेलेरी खातों के अलावा अन्य सभी खातों मंे निश्चित अवधि के दौरान एक निश्चित राशि मैंटेन करनी पड़ती है। बहुत सारे खाते होने पर उन्हें मैंटेन करना मुश्किल होगा और पेनल्टी भुगतना पड़ेगी।
* बहुत सारे बैंक खाते होने से आपको कई बार पता नहीं रहेगा कि किस खाते में कितनी राशि है। ऐसे में चेक बाउंस होने की भी आशंका रहेगी। ऐसा भी करें
* अपने सारे पुराने सेलेरी एकाउंट तत्काल प्रभाव से बंद करवा दें। यदि किसी के साथ ईसीएस जुड़ी हो तो उसे भी मौजूदा सेलेरी एकाउंट से संबंधित करवा सकते हैं।
* अगर आपका ट्रांसफरेबल जॉब है तो इमरजेंसी फंड के लिए उसी बैंक में खाता खुलवाएं जिसकी शाखाएं छोटे-बड़े सभी शहरों में हांे।