नई दिल्ली.
भारतीय डॉक्टरों ने एक वयस्क लिवर के 20 फीसदी हिस्से की मदद से दो बच्चों का लिवर प्रत्यारोपण कर नामुमकिन को मुमकिन कर दिखाया है। देश में इस तरह के पहले प्रत्यारोपण के बाद दोनों बच्चे पूरी तरह से स्वस्थ हैं। दुनिया में पहली बार 22 माह के बालक शौर्य और दो वर्षीय बालिका सिया के शरीर में इस तरह का प्रत्यारोपण किया गया है। ‘डॉमिनो लिवर ट्रांसप्लांट’ नाम की इस प्रक्रिया में यहां के सर गंगाराम अस्पताल के 20 विशेषज्ञ डॉक्टरों ने भाग लिया, जिन्हें पूरी शल्यक्रिया में 16 घंटे का समय लगा।
क्या है डॉमिनो लिवर ट्रांसप्लांट : इस अनोखी प्रक्रिया में एक ही लिवर की मदद से दो लिवर प्रत्यारोपित किए जाते हैं। सर्जरी करने वाले डॉक्टरों के दल के प्रमुख डॉ. एएस सोनी ने बताया कि एमएसयूडी से पीड़ित किसी व्यक्ति के लिवर का दूसरे को प्रत्यारोपण किया जा सकता है। इससे दूसरे को बीमारी नहीं होती, क्योंकि उसके शरीर में एंजाइम पैदा करने वाली कोशिकाएं सामान्य रूप से काम करती रहती हैं।
क्या थी बीमारी
शौर्य को मैपल सिरप यूरिन डिसीज थी, जबकि सिया को लैंगरहान सेल हिस्टियो-साइटोसिस (एलसीएच) नाम की दुर्लभ बीमारी थी। इस बीमारी का शरीर के कई अंगों पर दुष्प्रभाव पड़ता है। कई बार कीमोथेरैपी के बावजूद जब सिया का लिवर ठीक नहीं हुआ तो प्रत्यारोपण का सहारा लेना पड़ा।
कैसे किया करिश्मा
इस साल 31 जनवरी को हुए ऑपरेशन में शौर्य के शरीर में उसकी आंटी के लिवर का 20 फीसदी हिस्सा ही प्रत्यारोपित किया गया, जबकि उसके लिवर को सिया के शरीर में प्रत्यारोपित किया गया। शौर्य दानदाता के लिवर का प्रत्यारोपण कराने वाला दुनिया का सबसे कम उम्र का बालक बन गया है।
ऐसे हुई सर्जरी
तीन ऑपरेशन थिएटरों में सर्जरी के जरिए शौर्य और सिया के लिवर को पहले निकाल लिया गया। इसके बाद दानदाता (आंटी) के लिवर का कुछ हिस्सा निकाला गया। इसे शौर्य को लगाया गया और फिर उसके लिवर को सिया में लगा दिया गया। दोनों प्रत्यारोपण एक साथ किए गए। सर्जरी में वीन ग्राफ्टिंग (नसों को जोड़ना) का जटिल काम भी शामिल था।