..तो घर आए नन्ही परी
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..तो घर आए नन्ही परी

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adopt childसमाज के बदलते परिवेष में शादी करने की उम्र बदलने के साथ कई अन्य परिवर्तन भी हुए हैं। आज की युवती सुष्मिता सेन से प्रभावित होकर शादी से पहले ही किसी बच्चे को गोद लेकर मातृत्व सुख लेना चाहती है। करियर की चाह और भाग-दौड़ भरी जिंदगी में शादी की जिम्मेदारियों को जल्द न लेने की चाहत भी बड़ा कारण है। बच्चे को गोद लेना भी आसान काम नहीं। इसकी कुछ नियमावली है। जिसका पालन करने के बाद ही किसी नन्ही परी को घर लाया जा सकता है। हमारे कानून में पहले किसी महिला को बच्च गोद लेने की अनुमति नहीं थी। समय के साथ इस नियम में भी परिवर्तन आया है। अब कोी भी विधवा, तलाकशुदा या कुंवारी महिला बच्च गोद ले सकती है। इसके लिए उसकी उम्र 18 वर्ष होना जरूरी है। महिला शादीशुदा होने की स्थिति में यह अधिकार केवल उसके पति का होता है। इसके लिए भी पति का मानसिक रूप से संतुलित होना बहुत जरूरी है। साथ ही वह सामाजिक दायित्वों का पूर्ण निर्वहन कर रही हो। ऐसे अपना सकते हैं

किसी बच्चे को गोद लेने के लिए कुछ बातों का ख्याल रखना बहुत जरूरी है। जिनको पूरा करने के बाद ही कानूनी रूप से आप बच्चे के अभिभावक बन सकते हैं।

- लड़का हो या लड़की वह हिन्दू होना चाहिए।

- उसे पहले से किसी ने गोद न लिया हो।

- उसकी उम्र 15 साल से कम न हो।

- गोद लिए जाने वाले बच्चे की शादी न हुई हो। यदि कोई पुरुष लड़की को गोद ले रहा हो तो उसकी और लड़की उम्र में 21 वर्ष का अंतर होना जरूरी है। इसी तरह अगर कोई महिला लड़का गोद ले रही हो तो उनकी उम्र में भी 21 वर्ष का अंतर होना जरूरी है। साथ ही वे बच्चे की देख-रेख में पूरी तरह से सक्षम हों।






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