‘जग्गी’ ने जीती ‘पगड़ी’ की जंग
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‘जग्गी’ ने जीती ‘पगड़ी’ की जंग

ऑकलैंड. jagmohan ‘जिद है तो जीत है’, की तर्ज पर जांबाज जगमोहन माल्ही ने हिम्मत नहीं हारी और अपने पिता की अंतिम इच्छा पूरी करते हुए न्यूजीलैंड पुलिस में पगड़ी पहनने वाले पहले सिख होने का गौरव हासिल कर लिया। 32 वर्षीय जगमोहन पिछले 3 वर्ष से यहां के नेल्सन इलाके में कांस्टेबल के पद पर कार्यरत हैं।

भारत और न्यूजीलैंड क्रिकेट टीमों के बीच खेले गए पांचवें वनडे के दौरान स्टेडियम में सुरक्षा का दायित्व संभालने वाले जगमोहन यहां मौजूद भारतीय दर्शकों के आकर्षण और गौरव का केंद्र बने रहे। आठ वर्ष पहले भारत से न्यूजीलैंड आए जगमोहन ने जब यहां की पुलिस में नौकरी करनी चाही तो उन्हें दाढ़ी-मूंछ मुंडवाने व पगड़ी नहीं पहनने को कहा गया।

नौकरी पाने की जिद के चलते ‘जग्गी’ ने शुरू में तो यह समझौता कर लिया, लेकिन बाद में उन्हें यह नागवार गुजरने लगा। इस बीच जगमोहन के पिता उन्हें सच्चे सिख (दाढ़ी-मूंछ व पगड़ीधारी) के रूप में न्यूजीलैंड की सेवा करने को प्रेरित करते रहे। पिछले साल निधन से पहले भी पिता ने ‘जग्गी’ से अपनी अंतिम इच्छा के रूप में उनसे सच्चे सिख के रूप में पुलिस की नौकरी करने को कहा। पिता की अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए जगमोहन ने न्यूजीलैंड सरकार के खिलाफ लड़ाई छेड़ दी।

अपने हक के लिए लड़ रहे जग्गी को जनसहयोग भी मिला। अंतत: न्यूजीलैंड सरकार ने हार मानते हुए पुलिस की वर्दी में संशोधन किया। इसके तहत सिख पुलिसकर्मियों को दाढ़ी- मूंछ रखने और पगड़ी पहनने की इजाजत मिल गई।






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