स्कूल-आंगनबाड़ी में नहीं हैंडपंप, कुओं का पानी भी दूषित
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स्कूल-आंगनबाड़ी में नहीं हैंडपंप, कुओं का पानी भी दूषित

गौरेला. यहां से 8 किमी दूर मरवाही विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत नेवरी-नवापारा के नागथाल की उन्नत प्राथमिक शाला व आंगनबाड़ी केंद्र में हैंडपंप नहीं होने से बच्चे जर्जर हो चुके कुएं का मटमैला व दूषित पानी पीने को मजबूर हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य को खतरा हो सकता है।

गौरेला ब्लॉक में आने वाले नागथाल में राजीव गांधी शिक्षा मिशन की शिक्षा गारंटी योजना के तहत ईजीएस केंद्र की स्थापना की गई थी, जिसका वर्ष 2005 में उन्नत प्राथमिक शाला के रूप में उन्नयन हुआ। पथरीली टेकड़ी पर संचालित इस स्कूल में 49 बच्चे पढ़ते हैं, जिन्हें रोजाना मध्याह्न् भोजन के बाद खेत के उस जर्जर हो चुके कुएं का पानी पीना पड़ता है, जिसमें कचरा तैर रहा है। इस कुएं की जगत न होने से उसमें पानी के साथ बाहरी गंदगी भी पहुंच रही है, जिससे इसका पानी मटमैला हो चुका है। कुआं मालिक इस कुएं का पानी शुद्ध करने की दिशा में कोई ध्यान ही नहीं देता।

मोहल्ले में नहीं है हैंडपंप
नागथाल के स्कूल व आंगनबाड़ी में ही नहीं बल्कि 20-25 घरों के बीच बसे सवा सौ की आबादी वाला मोहल्ला जिसमें 75 प्रतिशत उरांव जाति के लोग रहते हैं, हैंडपंप नहीं है। काफी पहले यहां एक बोरिंग किया गया था, जिसके सूखने के बाद पीएचई विभाग उसका हैंडपंप निकालकर ले गया, तब से लोग यहां कुएं व ढोड़ियों का पानी पीने को विवश हैं।

अधूरा है शौचालय निर्माण
वर्ष 2005 में स्कूल के पास शुरू हुआ शौचालय का निर्माण कार्य आज तक अधूरा है, जिस पर छत ढालने के बाद वहां न तो यूरिनल, न ही लेट्रिन में शीट बिठाई गई। यहां लगा एकमात्र नालीदार टीन का दरवाजा जो जंग खाकर गल रहा है। सेप्टिक टैंक भी ढलाई नहीं होने से खुला पड़ा है, जिससे बच्चे यहां पेशाब व शौच के लिए खुले में जाने को मजबूर हैं।

आंगनबाड़ी केंद्र का कुआं भी सूखा
यही स्थिति शासकीय भवन नहीं होने से निजी मकान में संचालित लगभग 40 बच्चे वाले यहां के आंगनबाड़ी केंद्र की है। जहां बाड़ी में कुआं तो है पर सूखा हुआ। ऐसे में जिस कुएं का पानी यहां इस्तेमाल में लाया जा रहा है, उसमें भी कचरा तैर रहा है।

पानी के इस्तेमाल से कुएं के आसपास कीचड़ होने से बजबजा रही गंदगी कुएं में जा रही है, जिससे इस कुएं का पानी भी दूषित हो चुका है। ऐसे में आंगनबाड़ी आने वाले बच्चों के स्वास्थ्य का पोषण हो रहा होगा या कुपोषण..! अंदाजा लगाया जा सकता है। पर सरपंच, जनपद सदस्य, जिला पंचायत सदस्य इस समस्या पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। वहीं ग्राम सुराज में आवेदन के बाद भी पीएचई के अधिकारी यह कहकर अपना पल्ला झाड़ने की कोशिश करते हैं कि, मार्ग की स्थिति ठीक नहीं होने से वहां बोरिंग मशीन जाने में अड़चन है। यह सही है कि, यह मार्ग दुर्गम, ऊबड़-खाबड़ व कहीं-कहीं पगडंडियों भरा है, पर पहले भी यहां बोरिंग हुई थी और मशीन इसी रास्ते से आई थी।

दरवाजा नहीं मध्याह्न् भोजन शेड का
यहां मध्याह्न् भोजन शेड का निर्माण तो कर दिया गया है, पर उसमें दरवाजा नहीं लगाया है। बमुश्किल 5-6 फीट की लंबाई, चौड़ाई व 7 फीट की ऊंचाई वाले इस छप्परयुक्त शेड का निर्माण सिर्फ तीन दीवार पर किया गया है, चौथी दीवार के रूप में स्कूल भवन की दीवार का उपयोग किया गया है। उल्लेखनीय है कि इस शेड निर्माण के लिए पचास हजार रुपए की एकमुश्त राशि स्वीकृत हुई थी।

‘आचार संहिता के बाद देखेंगे’
वहां अलग से कोई हैंडपंप स्वीकृत नहीं हुआ है। इसके लिए संबंधित विभाग राशि प्रदान करता है। यह राशि पिछले मार्च में इसलिए लेप्स हो गई थी क्योंकि मार्ग की हालत ठीक नहीं होने से यहां बोरिंग मशीन नहीं जा पाई थी। अभी चुनाव आचार संहिता लागू है इसलिए इसे अब मई-जून में देखेंगे। -पी.एन. पिपरहा, एसडीओ-पीएचई






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