आईपीएल -2 शुरू होने के साथ ही विवादों में है। हद तक तब हो गई जब इसे देश के बाहर ले जाने का फैसला किया गया। अपने आपमें यह भी बड़ा सवाल है कि ऐसी नौबत क्यों आई। ब्लॉगर इस मुद्दे पर कैसे चुप रह सकते थे?
आईपीएल को लेकर ब्लाग जगत में काफी कुछ लिखा गया है। इस विषय पर मजेदार तरीके से महाजाल पर ऐसे दो विज्ञापनों पर सवाल उठाया गया है जो लगातार टीवी पर चल रहे हैं। लेखक का कहना है कि आईपीएल देश से बाहर जा चुका है लेकिन टीवी पर जो विज्ञापन जारी है उसमें सवाल यह है कि जिस मूर्ति पर कई पक्षी बीट कर रहे हैं वह मूर्ति है किसकी?
यह मूर्ति देखने पर किसी अंग्रेज की लग रही है। आईपीएल के मैच इंग्लैंड में क्यों करवाने के लिए बीसीसीआई मरी जा रही है। यह प्रश्न भी पूछा गया है कि आम चुनाव 15 अगस्त के आसपास आ गए तो हमें झंडा किसी दूसरे देश में फहराना होगा?
ऐसे ही जय हिंदी ब्लॉग के लेखक बालसुब्रमण्यम लिखते हैं कि यदि आईपीएल सात समंदर पार जा रहा है तो हमें क्या, यह वहां से लौटकर नहीं आए तो और भी अच्छा हो। सुब्रमण्यम लिखते हैं कि एक वक्त था जब क्रिकेट से राष्ट्रीयता की भावना पैदा होती थी, लेकिन आज आईपीएल ने किक्रेट की राष्ट्रीयता ही खत्म कर दी है। अब यह वह खेल नहीं रहा जो पूरे देश को बांधता था। आज यह सालाना समारोह जैसा हो गया है।
महके हैं आमों के बौर
चलते-चलते सीमा रानी की कविता पर भी एक नजर डाल लेते हैं। पतझड़ में शहरों की सूरत बदल चुकी है और पेड़ पुरानी पत्तियों को छोड़कर नई पत्तियों का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में सीमा की कविताएं दिल के करीब दिखती हैं। सीमा अपने ब्लॉग कुछ कविताएं कुछ हैं गीत पर लिखती हैं -
नीला आकाश लिखूं
पीपल की गाछ लिखूं
या लिखूं कि महके हैं आमों पर बौर
दहकता पलाश लिखूं
फागुन की बात लिखूं
या लिखूं रंग भरे सपने कुछ और।
आपकी राय के इंतजार में
ब्लॉगर्स पार्क आपको कैसा लग रहा है। यह बताना न भूलें। हम इंतजार कर रहे हैं आपकी राय का। तो देर किस बात की। कह दें अपनी दिल की बात।
संबंधित खबरें
* ब्लॉगर्स पार्क - नास्तिकता से मिलेगी आजादी