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चंडीगढ़। पंजाब समेत देशभर से बड़ी संख्या में पढ़े-लिखे लोग कनाडा तो चले जाते हैं, लेकिन वहां जाकर उन्हें जो काम करना पड़ता है, उससे उनके आत्मसम्मान को बहुत ठेस पहुंचती है। भारत में कभी कृषि विज्ञान के प्रोफेसर रहे विजय भोसेकर को इन दिनों कनाडा में 10 डॉलर प्रतिघंटे के हिसाब से सिक्यूरिटी गार्ड की नौकरी करनी पड़ रही है। भोसेकर यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज, हैदराबाद में प्रोफेसर रह चुके हैं।
कनाडा के एक पत्रकार को दिए इंटरव्यू में भोसेकर का कहना था कि उन्होंने सोचा तक नहीं था कि भारत में यूनिवर्सिटी में पढ़ाने और कृषि क्षेत्र में रिसर्च के बाद कनाडा में उन्हें ऐसे दिन देखने पड़ेंगे। टोरंटो में मॉल्स और भवनों के बाहर गार्ड की नौकरी करते हुए उनके मन पर जो बीतती है, उसे वही जानते हैं।
क्या है मजबूरीः 49 वर्षीय भोसेकर अप्रैल 2005 में कनाडा आए थे। इसके बाद उन्हें पता चला कि भारतीय डिग्रियों को कनाडा में मान्यता नहीं है। उन्हें संबंधित विषयों में कनाडियन कोर्स कर योग्यता परीक्षा पास करनी होंगी। घर का खर्च चलाने के लिए उन्हें मजबूरन गार्ड की नौकरी करनी पड़ रही है।
उम्मीद की किरण: विजय भोसेकर ओंटारियो इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रोलॉजिस्टस से सर्टिफिकेट कोर्स पास कर चुके हैं। अब वे शेरियडन कॉलेज से इन्वॉयरमेंट साइंस सर्टिफिकेशन कोर्स कर रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि ऐसा करके उन्हें वहां प्रोफेसर की नौकरी मिल सकेगी।