जारी है मंदी का कहर...
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जारी है मंदी का कहर...

usaजिस बात का डर था, वही हुआ। आज की सुबह न्यूयार्क के लिए अच्छी नहीं रही। दुनिया की एक प्रमुख सॉफ्टवेयर कंपनी से निकाले गए 42 वर्षीय वियतनाम मूल के जिविरली वूंग ने बेरोजगारी से तंग आकर तेरह से अधिक लोगों को मौत के घाट उतार दिया तो वहीं चालीस से अधिक लोगों को घायल कर दिया। और बाद में खुद को गोली मार ली। देखते-देखते वह दुनिया भर में सुर्खियों में छा गया। इससे पहले भी खबर आती रही है कि नौकरी गंवा चुके लोग किस तरह अपनी और अपने परिवार की हत्या करने को विवश हैं।

job न्यूयार्क में जब यह घटना घटी तो उसके एक दिन पहले ही अमेरिकी सरकार ने बेरोजगारी को लेकर कुछ आंकड़े दुनिया के सामने रखें। जिसमें कहा गया है कि ख्वाबों का यह मुल्क मंदी की मार से बुरी तरह जख्मी हो चुका है। स्थिति सुधरने की संभावना न के बराबर है।अमेरिका में मार्च महीने में अकेले 6.63 लाख लोगों ने अपनी नौकरीे गंवाई हैं। यहां बेरोजगारी दर अब बढ़कर 8.50 फीसदी हो गई है। यह 1983 के बाद से सबसे अधिक है। दिसंबर 2007 में शुरू हुई मंदी की मार से अब तक कुल 51 लाख लोगों ने अकेले अमेरिका में नौकरी खोई है।

नौकरी खोने के बाद बड़ी तादाद में अप्रवासी अमेरिकी अपने मूल देश लौट चुके हैं। जो लौट नहीं पाए हैं, वे बुरी तरह अपना जीवन यापन कर रहे हैं। जिनके पास कल तक अच्छा खासा बैंक बैलेंस और आलीशन मकान था। आज वह अपनी कारों में पूरे परिवार के साथ सड़क किनारे जीने को विवश हैं।

और बिगड़ सकती है स्थिति

अमेरिकी अर्थशास्त्रियों को भविष्य बेहतर नजर नहीं आ रहा है। सेंटर फॉर इॅकानामी एंड पालिसी रिसर्च के निदेशक डीन बैकर ने एक साक्षात्कार में कहा है कि अमेरिका में जो बेरोजगारी बढ़ रही है, वह पहले से ही कल्पनीय थी। स्थिति किस दिशा में जाएगी, कुछ नहीं कहा जा सकता है। उन्होंने कहा है कि यदि इस साल के अंत तक हम लोगों की जॉब बचा लें तो हम लकी होंगे। मंदी की मार से लड़ने के लिए अमेरिकी प्रशासन ने 787 अरब डॉलर खर्च करने की योजना बना चुकी है।

jobतीन महीने में बीस लाख लोग सड़क पर

अमेरिका में बीस लाख नौकरी इस साल के पहले तीन महीने में गई है। मंदी की मार यूं तो सभी सेक्टरों में पड़ रही है लेकिन सबसे अधिक मार उत्पादन, प्रोफेसनल, बैंक, आईटी, फार्मा और रिटले जैसे सेक्टरों पर पड़ी है। जनवरी से मार्च के दरम्यान उत्पादन सेक्टर में जहां 5.92 लाख लोगों ने अपनी नौकरी खोई है। वहीं, प्रोफेसनल सर्विस से जुड़े 4.62 लाख, निर्माण सेक्टर में 3.68 लाख, रिटेल में 1.45 लाख और वित्त सेक्टर में 1.43 लाख लोग निकाले जा चुके हैं।

आपकी राय

अमेरिका की मंदी ने जब मुंह खोला तो धीरे-धीरे पूरी दुनिया इसकी चपेट में आ गई है। हमारे नेताओं को पूरा विश्वास है कि भारत में मंदी का कोई असर नहीं है। ऐसे में आप क्या सोचते हैं, हमें जरूर बताएं। आप पर मंदी का क्या असर पड़ा है, यह भी आप हमसे शेयर कर सकते हैं।



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* मंदी की मार : शूटआउट13@ न्यूयार्क






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आपके विचार
amit Shah
Saturday, 4th Apr 2009, 5:00
स्थिति नहीं सुधरी तो मौत की संख्या बढ़ती जाएगी। इसके पूरी स्थिति के लिए बुश की नीतियां ही जिम्मेदार हैं। भारत यदि समय रहते नहीं चेता तो वहां भी यही सब होगा।
विष्‍णु ब
Saturday, 4th Apr 2009, 5:51
चुनावों तक मन्‍दी छुपाई जाएगी। चुनावों के बाद ही इसकी वास्‍तविकता और विकरालता सामने आएगी। तब बदहवासी और भगदड फैलेंगी। भारतीय मानसिकता कभी भी अर्थ केन्द्रित नहीं रहेगी। मानसिकत के जीन्‍स जब परिवर्तित किए जाएंगे तो वर्ण संकरता ही उपजेगी। इसीके लिए तैयार रहिए।
anita
Saturday, 4th Apr 2009, 22:43
लगता है ग्रेट डिप्रेशन फ़िर से आ गया है हम खुद इससे अभी प्रभावित नहीं हुए लेकिन डर तो लगता है जब अपने आस पास का माहौल देखते हैं चुनाव के बाद की स्थिती के बारे में सोच कर भी डर जाते है नेताओं ने कब पहले कुछ देखा है सिर्फ़ सत्ता और पैसे के जो अब देखेगे हमें खास कर नयी पीढ़ी की चिन्ता है जो कॉल सेन्टर में काम करते हैं