फैशन बाज़ार : मंदी की कैट वॉक
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फैशन बाज़ार : मंदी की कैट वॉक

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दुनिया रिसैशन के दौर से गुज़र रही है। लगभग हर क्षेत्र में मंदी के असर को देखा जा सकता है। हाल ही में दिल्ली में विल्स लाइफ स्टाइल इंडिया फैशन वीक और दिल्ली फैशन वीक सफलतापूर्वक संपन्न हुए। फैशन के बाज़ार में मंदी का असर क्या रहा, एक पड़ताल..

शन डिÊाइनर पायल जैन ने इस बार अपना कलैक्शन रैंप पर नहीं, बल्कि स्टॉल पर ही पेश किया। पायल मानती हैं कि रिसैशन का असर तो हुआ है। रिटेल पर तो इसका असर •यादा हुआ है, लेकिन ख़रीदार फिर भी ख़रीदेंगे, क्योंकि उन्हें अपने स्टोर्स भरने हैं।

लोग तो शॉपिंग करने आएंगे ही न। हां, यह ज़रूर है कि अब हर कोई प्राइस कॉन्शियस हो गया है। ग्राहकों के बजट भी कम हो गए हैं।

कपड़े की क्वालिटी पर वे •यादा ध्यान दे रहे हैं और मोल-भाव भी •यादा कर रहे हैं। वैसे डिÊाइनर दामों को लेकर पहले से ही कॉन्शियस हो गए थे। मुझे लगता है कि फैशन मार्केट पर 5-10 प्रतिशत ही मंदी का असर पड़ा है।

डिÊाइनर जोड़ी आशिमा लीना का मानना है कि मंदी का असर इस रूप में पड़ा कि हमें पहले से •यादा मेहनत करनी पड़ रही है। इस बात पर •यादा ध्यान देना पड़ा कि ड्रैसेज़ को और •यादा ख़ूबसूरत कैसे बनाएं ताकि वह डैशिंग लगें और उन पर कॉस्ट भी कम आए। ओवर हेड्स कैसे कम किए जाएं और टर्न-ओवर कैसे बढ़ाई जाए।

खुशाली कुमार का मानना है कि मंदी का असर तो पड़ा है, लेकिन बावजूद इसके मैंने अपने कलैक्शन की रेट लिस्ट में कोई बदलाव नहीं किया। वह बताती हैं कि मेरे कपड़ों की रेंज 2500 से 22,000 रुपए के बीच है। यह रेंज पिछले साल भी थी और इस साल भी यही रही। मेरे कपड़े पहले से ही बहुत रीÊानेबल हैं।

प्राइस में कटिंग, नो!

रोहित बल का कहना है कि ओवरआल देखें, तो मंदी का असर पड़ा है, लेकिन मेरे क्लाइंट्स फिक्सड हैं। वे मेरे अलावा कहीं और नहीं जाते। इसलिए व्यक्तिगत रूप में मेरे बिज़नेस पर रिसैशन का असर नहीं पड़ा है। रही बात फिगर की तो मैं अपने कलैक्शन की प्राइस रेंज रिवील नहीं करता।

डिÊाइनर राहुल खन्ना का कहना है कि हम डेली यूÊा गारमेंट्स बनाते हैं, इसलिए हमारे बिज़नेस पर रिसैशन का असर बहुत कम दिखा। रही बात प्राइस कम करने की, तो हमारी प्राइस रेंज पहले ही बहुत अफरेडेबल है। हमें अपने प्राइस कम करने की ज़रूरत ही नहीं पड़ी।

डिÊाइनर राहुल गुंजन के अनुसार मंदी का असर बहुत •यादा दिखाई दिया। हमारी शुरुआती रेंज बहुत •यादा नहीं थी। तीन हज़ार रुपए से हमारे कपड़ों की बिक्री शुरू होती है, लेकिन ख़रीदारों ने उसे भी सस्ता करने के लिए कहा।

इस तरह हमने अपना मैक्सिमम प्राइस २५ हज़ार से घटाकर २क् हज़ार रुपए किया। कई ख़रीदारों ने हमसे कहा कि आप कढ़ाई कम कर दें और तीन हÊार वाले पीस को १,५क्क्-२क्क्क् रुपए में बेचें। शुरुआती रेंज को बेचने के लिए हमें ऐसा करना पड़ा। इस बार हमारे ड्रैसेज़ को मुंबई, बंगलूर, चेन्नई और दिल्ली के ख़रीदारों का अच्छा रिस्पॉक्स मिला। विदेशी ग्राहकों में पैरिस, स्वीडन और ऑस्ट्रिया के ख़रीदारों ने रुचि दिखाई।

फैशन डिÊाइनर रेणु टंडन के शो में दिल्ली के पेज ३ सितारों की भरमार रही। रेणु का मानना है कि इस बार मंदी की वजह से फैशन बिज़नेस में २क्-२५ प्रतिशत का असर दिखाई दिया।

स्टार्स की चमक

पायल जैन का कहना है, ‘मुझे नहीं लगता कि फ़िल्मी स्टार्स से कोई असर पड़ता है। अगर आपके कपड़े अच्छे होंगे, तो बिज़नेस होगा। हां, अगर आप शो में ग्लैमर जोड़ना चाहते हैं या आप फ़िल्मी दुनिया के लिए कपड़े डिÊाइन करते हैं, जैसे रॉकी एस या मनीष मल्होत्रा, तो अलग मुद्दा है। वह उनका मार्केट है। उनसे रिलेट करते हैं उनके कपड़े। लेकिन जो बुलाते हैं उनके बिज़नेस में असर पड़ता ही होगा, वरना क्यों कोई हर साल उन्हें बुलाएगा। मेरे लिए इस बात पर कोई कमेंट करना मुश्किल है।

रेणु टंडन ने इस बार अपने कलैक्शन को पेश करने के लिए दिल्ली की पेज ३ सैलिब्रिटीज़ को बुलाया। कारण बताते हुए रेणु का कहना है, ‘वे महिलाएं अलग-अलग पेशे से जुड़ी थीं और उनका फिगर मॉडल्स के फिगर की तरह नहीं था, इसलिए एक आम औरत ख़ुद को उससे रिलेट कर सकती है कि यह ड्रैस मुझपर भी अच्छी लगेगी। लेकिन कोई मॉडल वह ड्रैस पहने, तो महिलाएं मॉडल्स के साथ ख़ुद को नहीं जोड़ पातीं।’

देसी फैशन में विदेशी रुचि

पिछले कुछ साल से फैशन वीक में विदेशी ग्राहकों की रुचि काफ़ी बढ़ी है। हर साल विदेशी ग्राहकों की संख्या भी फैशन वीक्स में बढ़ती जा रही है। क्या वजह है इसकी? क्यों रुचि ले रहे हैं विदेशी ग्राहक इंडिया फैशन इंडस्ट्री में, आइए जानें-

दिल्ली फैशन वीक के प्रमुख सुमित नायर के अनुसार, ‘भारतीय बाज़ार की ओर विदेशी ख़रीदारों की रुचि का मुख्य कारण मुझे अपने देश की मज़बूत क्राफ्ट, टैक्सटाइल, हैंडीक्राफ्ट, एम्ब्रॉयड्रीज़ के साथ-साथ कपड़ों की क्वालिटी लगती है। दूसरा कारण भारतीय डिÊाइनर बहुत योग्य हैं।

तीसरा डिÊाइनरों की नई पीढ़ी परंपरागत भारतीय हैंडीक्राफ्ट को मॉडर्न गारमैंट में बहुत ही ख़ूबसूरती से यूÊा कर रही है, जो विदेशी ख़रीदारों को बहुत लुभा रहा है। एक बड़ा कारण यह भी है कि आज भारत विश्व में तेज़ी से उभरता हुआ देश है।

वह अपनी उपस्थिति हर क्षेत्र में दर्ज करा रहा है। भारत को लेकर विदेशियों के मन में यह क्रेÊा भी रहता है कि देखें फैशन सैक्टर में भारत क्या कर रहा है।’

एफडीसीआई के प्रमुख सुनिल शेट्टी का मानना है कि हमारे डिÊाइनरों के काम में नयापन है। हाथ की कारीगरी बहुत बड़ा कारण है विदेशी ग्राहकों के भारतीय बाज़ार में रुचि लेने का। इसके अलावा भारत की रंग-बिरंगी संस्कृति व परंपरा को डिÊाइनर जिस तरह ख़ूबसूरती से अपने कपड़ों में पेश करते हैं, वह विभिन्नता उन्हें भारतीय डिÊाइनरों से ही मिल पाती है। हमारे डिÊाइनरों का काम बहुत ओरिजनल होता है।

पिछले साल और इस साल के प्राइÊा रेंज में फ़र्क़

डिÊाइनर पिछला प्राइÊा (रुपयों में) इस बार का प्राइÊा (रु. में)

पायल जैन ५क्क्क्-६क्क्क् ३क्क्क्-४क्क्क्

मालिनी रमानी ४500 से शुरू २,५क्क् से शुरू

खुशाली कुमार २,५क्क्-२२,क्क्क् २,५क्क्-२२,क्क्क्

रोहित गांधी, राहुल खन्ना ३,५क्क्-१५,क्क्क् ३500-१५,क्क्क् तक

आशिमा लीना 8,500 से शुरु ८,500 से शुरु

राहुल गुंजन 3,000-२५,000 3,000-२0,000






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