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Personal Finance Personal Finance यदि भत्ते की राशि का एक हिस्सा खर्च होने से बच जाता है तो शेष राशि कर्मचारी की आय में जुड़ जाएगी और इस प्रकार कर के दायरे में आ जाएगी। उदाहरण के लिए अगर कंपनी ने भत्ते के रूप में 300 रुपए दिए हैं और आप 200 रुपए खर्च करते हैं तो बची हुई 100 रुपए की राशि करयोग्य मानी जाएगी। ऐसे में भत्ता हासिल करने वाले कर्मचारी अपने नियोक्ता को ऐसा घोषणा पत्र जरूर दे दें कि संपूर्ण भत्ता डच्यूटी के दौरान खर्च हो गया।
शर्माजी अक्सर दौरे पर रहते हैं। जब भी वे किसी दौरे पर जाते, उनकी कंपनी की ओर से उन्हें एक अच्छी राशि दैनिक भत्ते के रूप में दी जाती। एक करदाता होने के नाते उनके दिमाग में एक बात अक्सर रहती कि उन्हें मिलने वाले इस दैनिक भत्ते पर भी क्या उन्हें कर का भुगतान करना होगा?
भारतीय आयकर अधिनियम 1961 की धारा 10(14)(1) शर्माजी को राहत प्रदान करती है। यह धारा कहती है कि यदि कोई नियोक्ता अपने कर्मचारी को डच्यूटी का पालन करने के लिए विशेष भत्ता (जैसे दैनिक भत्ता) देता है तो उस पर कोई कर देय नहीं होगा।
इसी के विस्तार स्वरूप आयकर नियम 1962 के नियम 2बीबी में दैनिक भत्तों समेत उन सभी भत्तों का उल्लेख किया गया है जिन पर कर की छूट मिलती है, यानी जिनका वर्णन धारा 10(14)(1) में किया गया है। इस नियम में कई भत्तों की ऊपरी सीमा के बारे में भी बताया गया है। हालांकि दैनिक भत्ते सहित कुछ भत्तों की ऊपरी सीमा के बारे में इस नियम में कोई उल्लेख नहीं किया गया है। इसका मतलब है कि इनमें कर छूट का कितना भी फायदा उठाया जा सकता है। इसकी कोई अधिकतम सीमा नहीं है।
दैनिक भत्ते के मामले में कर्मचारी के साथ-साथ नियोक्ता को भी फायदा होता है। नियम 2बीबी को ध्यान से पढ़ने पर पता चलता है कि यदि कोई नियोक्ता अपने कर्मचारी को दैनिक भत्ते के रूप में राशि देता है तो वह उस कर्मचारी के लिए पूरी तरह करमुक्त होगी। साथ ही नियोक्ता इस राशि को अपने बिजनेस खर्च के रूप में दर्शा सकता है। इस प्रकार एक ही भत्ते से कर्मचारी और नियोक्ता दोनों लाभ उठा सकते हैं।
लेखक जाने-माने कर एवं निवेश विशेषज्ञ हैं।