म्युचूअल फंड में निवेश पर मिलने वाला रिटर्न उस फंड के प्रदर्शन पर निर्भर करता है। लेकिन प्रदर्शन से पहले यह बात ज्यादा अहम होती है कि आपने किस फंड का चयन किया है। इन दिनों बाजार में इतने म्यूचुअल फंड आ चुके हैं कि निवेशक के लिए एक अच्छे फंड का चुनाव करना बड़ा मुश्किल हो जाता है।
आखिर निवेशक अपने म्यूचुअल फंड का चुनाव कैसे करें, किस आधार वह फंड में पैसा लगाएं? इस संबंध में वैसे तो कोई स्पष्ट नियम तय नहीं किए जा सकते, लेकिन फिर भी किसी फंड के चुनाव के ये आधार बन सकते हैं :
निवेश का लक्ष्य : म्यूचुअल फंड में निवेश करने से पहले तो आप यह तय करें कि आपके निवेश का लक्ष्य क्या है। यानी आप टैक्स बचाना चाहते हैं, नियमित आय चाहते हैं या दीर्घावधि का कोई कार्य जैसे बच्चे की शादी या शिक्षा के लिए पैसा जमा करना चाहते हैं, इत्यादि। यदि आप टैक्स बचाना चाहते हैं तो डेट फंडों के बजाय इक्विटी फंडों मंे निवेश करना उपयुक्त रहेगा। इस सिलसिले में इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम (ईएलएसएस) बेहद लाभदायक साबित हो सकती हैं जिनमें निवेशक को आयकर अधिनियम की धारा 80 सी के तहत भी टैक्स का लाभ मिलता है। अल्पावधि के डेट फंड नियमित आय प्रदान करने में मददगार साबित होते हैं।
पिछला प्रदर्शन : किसी भी फंड में निवेश करने से पहले उसका पिछला प्रदर्शन जरूर देख लें। इससे मोटे तौर पर आपको इस बात का अंदाजा हो जाएगा कि फंड का भविष्य क्या रहने वाला है। साथ ही फंड की तुलना अपनी ही श्रेणी के दूसरों फंडों के साथ भी कर लें। एक सवाल यह उठेगा कि न्यू फंड ऑफर (एनएफओ) के साथ क्या किया जाए क्योंकि उनका तो ट्रैक रिकार्ड होता नहीं? इसी आधार पर विशेषज्ञ एनएफओ में निवेश करने से बचने की ही सलाह देते हैं।
पोर्टफोलियो : पोर्टफोलियो से मतलब है कि फंड किस सेक्टर में निवेश करेगा या कर रहा है। भविष्य में किस सेक्टर के अच्छा प्रदर्शन करने की उम्मीद है, इस बात का अनुमान लगाना आसान होता है। ऐसे में पोटफोलियो के आधार पर भी म्यूचुअल फंड स्कीम का चयन किया जा सकता है ताकि अच्छा रिटर्न मिलने की उम्मीद रहे। पोर्टफोलियो की जानकारी फंड हाउस से की जा सकती है। साथ ही एंट्री लोड और खासकर एक्जिट लोड का भी पता जरूर लगा लें।
उम्र के मायने
* 21 से 35 साल ..इक्विटी फंड चुनंे ताकि दीर्घावधि तक निवेश का फायदा मिल सके। इस उम्र मंे जोखिम उठाया जा सकता है।
* 36 से 55 साल .. ईएलएसएस का चयन करें ताकि टैक्स बचाया जा सके। इस उम्र में टैक्स दायित्व अमूमन ज्यादा ही होता है। इसमें जोखिम मध्यम स्तरीय होता है।
* 60 से आगे ..डेट फंडों का चयन करें। अपेक्षाकृत सुरक्षित होने के साथ-साथ नियमित आय भी देते हैं।