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जीवन बीमा हर व्यक्ति के लिए बेहद जरूरी है। प्रत्येक व्यक्ति को बेसिक इंश्योरेंस तो करवाना ही चाहिए, लेकिन आमतौर पर देखने में आता है कि बीमा और उसकी विभिन्न पॉलिसियों को लेकर चिंता बहुत कम की जाती है। जीवन बीमा को लेकर एक आम व्यक्ति का क्या नजरिया होता है, उसी पर प्रकाश डालते हैं और बताते हैं कि ऐसा नजरिया क्यों ठीक नहीं है।

क्या करते हैं..

1. निवेश मानते हैं

बीमा की पॉलिसी खरीदते समय अक्सर लोग इसे निवेश मानकर खरीदते हैं, जबकि यह पैसे का नहीं, बल्कि जिंदगी का निवेश होता है। यह भी निवेश का काम कर सकता है, लेकिन केवल दीर्घावधि में। यदि आप बीमा को अल्पावधि का निवेश मानकर निवेश करना चाहते हैं तो बेहतर है कोई और माध्यम ढूंढ लें।

2. तुलना करते हैं

लोग इसे निवेश ही नहीं मानते, बल्कि निवेश के दूसरे साधनों के साथ तुलना भी करते हैं। वे तुलना करते हैं कि उन्हें म्यूचुअल फंड में तो 20 फीसदी का रिटर्न मिल रहा है और जीवन बीमा में केवल 10 फीसदी का। लेकिन दोनों में बड़ा अंतर है।

उदाहरण के लिए यदि किसी ने पांच लाख रुपए का बीमा करवाया है और एक साल बाद किसी अनहोनी में उसका निधन हो जाता है तो उसके निकट परिजनों को पांच लाख रुपए की पूरी राशि मिलेगी। इसके विपरीत म्यूचुअल फंड में भले ही रिटर्न की दर अपेक्षाकृत अधिक हो, मृतक के परिजनों को राशि एनएवी के हिसाब से मिलेगी जो बीमित राशि से कम ही होगी।

क्या नहीं करते हैं..

1. जरूरत का ध्यान नहीं रखते

अक्सर लोग इसलिए बीमा लेते हैं कि उनके किसी साथी ने भी वैसा ही बीमा कवर लिया है। वे यह नहीं देखते कि क्या उन्हें उसकी जरूरत भी है अथवा नहीं। उदाहरण के लिए यदि कोई व्यक्ति किसी जोखिम वाले काम यानी सेना या खदान में कार्यरत है तो हो सकता है उसने टर्म पॉलिसी भी ले रखी हो। आप अधिक सुरक्षित कार्य में हो तो एक बेसिक पॉलिसी लेने के अलावा पैसा अन्य जगह निवेश कर सकते हैं।

2. समीक्षा नहीं करते

व्यक्ति एक बार बीमा लेकर बैठ जाता है, जबकि उसे समय-समय पर अपनी बीमा जरूरतों की समीक्षा भी करते रहना चाहिए। अपनी लाइफ स्टाइल में बदलाव आने या आय बढ़ने पर बीमा के कवर भी बढ़ाते जाने चाहिए। इससे आप न केवल अपने परिजनों की भावी जिंदगी के प्रति निश्चिंत हो सकेंगे, बल्कि आयकर के रूप में भी आपको फायदा होगा। मेडिक्लेम की पॉलिसी लेने के बारे में भी सोचा जा सकता है।