शिमला. दूषित जल पीने से शहर में लोग पीलिया की चपेट में आने लगे है। रिपन अस्पताल में कई लोग पीलिया के चलते इलाज के लिए आ चुके है। जिनमें संजौली, कुसुम्पटी और शोघी तक से मरीज इलाज के लिए आ रहे है।
इसके अलावा आईजीएमसी में पीलिया से ग्रस्त मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। पिछले एक सप्ताह के दौरान रिपन अस्पताल में एक दर्जन से अधिक पीलिया के संभावित मरीज इलाज के लिए आ चुके है।
लोगों के पीलिया की चपेट में आने की मुख्य वजह से दूषित पेयजल बताया जा रहा है। इसके अलावा कुछ मामलों में बाजार में कटे फल व बिना धुली हुई सब्जियों के सेवन भी पीलिया फैलने की आशंका जताई जा रही है, जबकि डॉक्टरों का कहना है कि दूषित पानी पीने के कारण पीलिया (हेपेटाइट्स-ए) की मुख्य वजह है।
विकट हो सकती है स्थिति
शहर में लोग अब पीलिया की गिरफ्त आने लगे है। गर्मी के मौसम में यह समस्या और भी अधिक बढ़ सकती है। पेयजल संकट के चलते लोग प्राकृतिक जल स्त्रोतों पर निर्भर हो रहे है और इन स्रोतों के संक्रमित होने की अधिक आशंका है।
पीने की पानी की किल्लत के चलते लोग इन दिनों शहर में लोग ढली, कनलोग, धोबीघाट, मल्याणा, संजौली, कृष्णानगर और लक्क़ड़ बाजार स्थित बावड़ियों से पीने के पानी का गुजारा चला रहे है। पेयजल की आपूर्ति करने वाले अश्विनी खड्ड, गुम्मा, गिरी, चुरट्र जगरोटी और चेहड़ जल स्त्रोतों के भी दूषित होने की आशंका भी शहर में पीलिया की वजह हो सकती है।
ऐसे फैलता है
पेयजल स्त्रोतों में मल की गंदगी मिलने से हेपेटाइट्स ए का वायरस व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर जाता है। जिससे व्यक्ति का पाचन तंत्र बुरी तरह बिगड़ जाता है। इसके अलावा यह वायरस लीवर सेल्स को प्रभावित करता है।
आईजीएमसी के माइक्रबायोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. अनिल कांगा का कहना है कि पीलिया की सबसे बड़ी वजह दूषित पेयजल ही है। शरीर में कमजोरी आना और पेट का खराब होना इस रोग के लक्षण है।
पहले भी हुए सैंपल फेल जनवरी 2007 में कुसुम्पटी और मल्याणा क्षेत्र में पेयजल स्रोत सीवरेज की गंदगी मिलने से दर्जनों लोग पीलिया की चपेट में आए थे। उस समय लिए गए पानी के सैंपल भी फेल हुए थे। इस बार भी शहर में ऐसी स्थिति की आशंका बढ़ गई है।
जबकि पानी को संक्रमण मुक्त करने के लिए समय समय पानी की क्लोरीनेशन जरुरी है। इससे पानी में पनपने वाले वायरस और बैक्टिरीया पर लगाम लग जाती है। डॉक्टरों का कहना है कि लोगों को पानी उबाल कर पीना चाहिए।