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मुंबई. बांबे स्टॉक एक्सचेंज में सात साल पहले शुरू हुए फ्यूचर कारोबार आज कल सुस्त होता नजर आ रहा है। निवेशकों ने फ्यूचर का साथ छोड़ अब ऑप्शन का साथ पकड़ लिया है। जहां वर्ष 2007-08 तक फ्यूचर में जबरदस्त कारोबार होता था, वहीं अब इसमें धीमे-धीमे गिरावट आनी शुरू हो गई है।

साल 2002 से बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) में शुरू हुए फ्यूचर कारोबार में जहां पिछले 2007-08 तक के सात सालों तक जबरदस्त ट्रेडिंग होती थी, वहीं 2008-09 से यह रुख पलट गया है और अब फ्यूचर की बजाय ऑप्शन में च्यादा ट्रेडिंग हो रही है।

फ्यूचर सौदों में भविष्य की किसी तिथि पर तय कीमत पर खरीद या बिक्री करनी ही होती है, जबकि ऑप्शन सौदों को पूरा करने की बाध्यता नहीं होती और कारोबारी इसे स्वीकार या खारिज कर सकता है। बीएसई से मिले आंकड़ों के मुताबिक 2007-08 में फ्यूचर इंडेक्स में 30207 अरब रुपए का कारोबार हुआ था, जबकि इसी अवधि में ऑप्शन इंडेक्स में 13621 अरब का कारोबार हुआ था। लेकिन 2008-09 में यह रुझान बदल गया। इस अवधि में जहां फ्यूचर में 35701 अरब रुपए का कारोबार हुआ, वहीं ऑप्शन में 37315 अरब रुपए का कारोबार हुआ।

इस तरह फ्यूचर में करीब दो हजार अरब रुपए का कम कारोबार हुआ, जबकि ऑप्शन में यह करीब तीन गुना बढ़ गया। नए वित्त वर्ष 2009-10 के आंकड़ों के मुताबिक फ्यूचर के मुकाबले ऑप्शन में 40 फीसदी अधिक ट्रेडिंग हुई है। अप्रैल में अब तक के 13 दिनों के आंकड़े बताते हैं कि कारोबारियों का पसंदीदा अब फ्यूचर नहीं बल्कि ऑप्शन इंडेक्स बन गया है। एक अप्रैल को जहां ऑप्शन में 210 अरब का कारोबार हुआ, वहीं फ्यूचर में महज 146 अरब का कारोबार हुआ।

दो अप्रैल को ऑप्शन में 247 अरब का कारोबार तो फ्यूचर में 130 अरब, 6 अप्रैल को ऑप्शन में 187 अरब तो फ्यूचर में 117 अरब, 8 अप्रैल को ऑप्शन में 251 अरब व फ्यूचर में 172 अरब और 9 अप्रैल को ऑप्शन में 240 करोड़ रुपए का कारोबार, जबकि फ्यूचर में महज 173 अरब का कारोबार हुआ।

जानकारों का कहना है कि इस बदलाव के पीछे कई कारण हैं। एक तो पिछले साल भर से शेयर बाजार में अनिश्चितता छाई हुई है। दूसरे, फ्यूचर सौदों में कारोबारियों को मार्जिन पहले भरना होता है और ऑप्शन में केवल प्रीमियम भरना होता है। यदि कारोबारियों को ऑप्शन में नुकसान होता है केवल प्रीमियम का नुकसान होता है। फ्यूचर में जहां सिक्युरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स (एसटीसी) लगता है, वहीं ऑप्शन में एसटीसी नहीं लगता है। जानकार बताते हैं कि फ्यूचर में मार्जिन पहले भरने पर यदि नुकसान हुआ तो ऑप्शन के प्रीमियम से अधिक नुकसान होता है।

इस समय बाजार की अनिश्चितता के कारण कोई भी कारोबारी अधिक नुकसान सहने की हिम्मत नहीं कर सकता। उनका कहना है कि जब से बाजार बढ़ रहा है लोगों को अनुमान है कि बाजार नई ऊंचाई छुएगा, पर यह भी संभव है कि नई उंचाई छूने के बाद बाजार में करेक्शन होगा। जिस तरह से बाजार 11000 के अंक को पार कर गया है उससे तो संभावना यही है कि अगले हफ्ते में बाजार आगे जा सकता है। लेकिन जब चौथी तिमाही के परिणाम आएंगे, तब बाजार में अधिक करेक्शन देखा जा सकता है। गौरतलब है कि अगले हफ्ते से ही कंपनियों के तिमाही परिणाम आने शुरू हो जाएंगे।