यह मेरे लिए सबसे बड़ा अचीवमेंट है। ये कहना, एमएनआईटी इंस्टीट्यूट की भावना जैन का है। उन्होंने कॉमन एडमिशन टैस्ट कैट के एग्जाम में 98.85 पर्स्ेटाइल अंक के साथ टॉप किया है। वे एमएनआईटी से बीटैक कर रही हैं। भावना बताती हैं, जिस दिन मेरा रिजल्ट डिक्लेयर हुआ, उसी दिन मेरा बर्थ डे भी था। सभी फ्रैंड्स मेरे साथ थीं। सब लोग खुश थे, लेकिन मुझे टेंशन हो रही थी, कि क्या होगा मेरा रिजल्ट आने वाला है।
सभी लोगों के फोन आ रहे थे। थोड़ी देर में मेरी फ्रैंड ने मुझे आकर बताया-भावना टेंशन मत ले तेरा सलैक्शन हो गया। भावना बताती हैं मेरे पेरेन्ट्स सीकर रहते हैं और जब मैंने उन्हें फोन पर ये न्यूज दी तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं था। वाकई में मेरे पेरेन्ट्स की मुझसे बहुत उम्मीदें हैं। शायद मेरा टॉप करना उन्हीं की दुआओं का असर है। मैं होस्टल में रहती हूं। जब मैं अपने पेरेन्ट्स के साथ होती थी, तो छोटी-छोटी खुशियां सब मिलकर सेलिब्रेट करते थे।
इतनी बड़ी खुशी मिली, लेकिन मैं अपने पेरेन्ट्स के साथ नहीं थी। फिर भी उन सबकी दुआएं मेरे साथ थीं जो आज मैं इस मुकाम पर पहंची हूं। वे बताती है, मैंने कभी सोचा नहीं था, कि मेरी बर्थ डे पर मुझे इतना अच्छा गिफ्ट मिलेगा, जिससे मेरे साथ मेरे पेरेन्ट्स को भी खुशी होगी। भावना के पापा लक्ष्मी चंद जैन कहते हैं, मेरा हाऊस होल्ड प्लास्टिक का बिजनेस है। मेरी फैमिली बहुत एजूकेटिड है। मेरी पत्नी निशा जैन भी बहुत क्वालीफाइड हैं।
उनकी पत्नी निशा जैन बताती हैं मेरे चार बेटियां हैं। जब मेरे चार बेटियां हुई थीं तो सब लोगों ने कहा था, कि एक भी बेटा नहीं है। वंश कैसे आगे चलेगा। मैं लोगों की बातें सुनकर पक चुकी थी। मैंने उस दिन से सोच लिया था, कि मैं अपनी बेटियों को बहुत पढ़ाऊंगी। जिससे लोग उन्हें हमारे नाम से नहीं बल्कि उनके नाम से हमें पहचाने। वो सपना हमारा पूरा हुआ। आज मेरी चारों बेटियों ने हमारा सिर ऊंचा कर दिया।
मेरी बड़ी बेटी निधि लन्दन में डॉक्टर है, दूसरी बेटी अनुपमा स्वीडन में सी.ए है, तीसरी बेटी खुशबू यूएस में डॉक्टर है और चौथी बेटी भावना ने कैट में फस्र्ट रैंक लाकर हमारा नाम रोशन कर दिया। आईआईएम बैंगलोर में इसका सलैक्शन हो गया। सिम्बॉयसिस पुणो में भी इसका सलैक्शन हो गया है, लेकिन ये बैंगलोर जाना चाहती थी। निशा बताती हैं हमने बेटियों पर कभी प्रेशर नहीं डाला। जब हमें भावना ने अपने रिजल्ट के बारे में बताया तो हमारे खुशी के आसूं नहीं रुके। सही में आज मेरी तमन्ना पूरी हो गई। आज लोग बेटियों के नाम पर हमें पहचानते हैं।