जूते और चप्पलों के बाद अब खड़ाऊ आम आदमी का हथियार बन गई है। इराक से शुरू हुआ जूते का सफर अब ब्रिटेन होते हुए भारत की राजधानी दिल्ली का सफर करते हुए मप्र के कटनी शहर में पहुंच चुका है। दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश के पूर्व राष्ट्रपति जार्ज बुश, चीनी प्रधानमंत्री वान च्या पाओ, भारतीय गृहमंत्री पी. चिदंबरम, नवीन जिंदल से गुजरता हुआ आज भाजपा के वरिष्ठ नेता और पीएम इन वेटिंग लालकृष्ण आडवाणी तक पहुंच गया।
जूता लगे या न लगे लेकिन इसकी मार पड़ती ही है। सभ्य समाज में जूता फेंकने को कभी भी जायज नहीं ठहराया जा सकता है। लेकिन चारों ओर से निराश लोगों के लिए जूता अब एक हथियार बन गया है। जूता फेंक कर लोग न सिर्फ अपनी भड़ास निकाल रहे हैं बल्कि उन मुद्दों को भी सामने ले आते हैं जिन पर हमारे नेता ध्यान नहीं देते हैं। चाहे वह इराक में अमेरिकी द्वारा मचाई तबाही हो या फिर सिक्ख दंगों के आरोपियों को सरेआम छोड़ देना हो।
लालकृष्ण आडवाणी भी नहीं बच पाए खड़ाऊ की मार से
कहां - मप्र के कटनी में एक चुनावी रैली के दौरान।
किसने फेंका- भाजपा के ही एक कार्यकर्ता ने।
क्यों - पार्टी में अपनी उपेक्षा से दुखी होकर यह कदम उठाया।

नवीन जिंदल पर भी जूता
कहां - हरियाणा के कुरूक्षेत्र में कांग्रेस कार्यकर्ताओं की बैठक में
किसने फेंका- नवीन जिंदल पर जूता फेंकने वाला एक रिटायर्ड प्रिंसिपल राजबीर था।
क्यों -जूता फेंकने वाले राजबल अपने बेटे को नौकरी से निकाले जाने से नाराज थे।

गृहमंत्री भी नहीं बच पाए जूते की मार से
कहां - दिल्ली में एक प्रेस वार्ता के दौरान।
किसने फेंका- दैनिक जागरण समाचार पत्र के वरिष्ठ संवाददाता ने।
क्यों फेंका - सीबीआई के द्धारा सिक्ख दंगों के आरोपियों को क्लीनचिट दिए जाने से नाराज था।
इजरायली राजदूत पर भी जूते की मार
कहां - स्टॉकहोम यूनिवर्सिटी में।
किसने फेंका - दर्शक दीर्घा से दो लोगों ने।
क्यों फेंका- फिलीस्तीन पर इजरायली नीतियों का विरोध करना।

चीनी प्रधानमंत्री भी नहीं बच पाए जूते की मार से
कहां - ब्रिटेन के कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में
किसने फेंका - यूनिवर्सिटी के एक स्टूडेंट ने।
क्यों फेंका - यूनिवर्सिटी कैंपस में चीनी प्रधानमंत्री को बुलाए जाने से।

बुश पर एक के बाद एक पड़े दो जूते
कहां - बगदाद में एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में।
किसने फेंका - इराक के पत्रकार मुंतजर अल जैदी ने।
क्यों फेंका - इराक में लगातार बढ़ते अमेरिकी दबदबे से नाराज थे।
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