पानी के लिए हरियाली की बलि
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पानी के लिए हरियाली की बलि

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भोपाल. नर्मदा के पानी के लिए भोपाल में हरे पेड़ों को काटा जा रहा है। भोपाल शहर में ही करीब 1100 पेड़ काटे या फिर अन्‍यत्र स्‍थान परिवर्तित किए जा रहे हैं। प्रगति पेट्रोल पम्‍प से बोर्ड ऑफिस चौराहे के पास आज स्‍थानीय नागरिकों के विरोध के चलते पेड़ काटना बन्‍द कर दिया गया।

शहर के विभिन्‍न नागरिक और स्‍थानीय रहवासी हरे भरे पेड़ों को काटने के सरकार के निर्णय से नाखुश है। उनका कहना है कि नर्मदा का पानी जितना जरूरी है पर्यावरर्णीय लिहाज हरे भरे पेड़ों को बचाना भी उतना ही महत्‍वपूर्ण है। इसलिए पाइपलाइन बिछाने के लिए कोई वैकल्‍पिक तरीका ढूंढा जाना चाहिए।

भास्कर डॉट कॉम ने जब लोगों से बात की तो लोगों में आक्रोश फूट पड़ा। अब स्थानीय लोग आंदोलन का मन बना रहे हैं। भोपाल के प्रकृति प्रेमी अजय दूबे ने बताया कि जल्दी ही चिपको आंदोलन की तर्ज पर इन पेड़ों को बचाने के लिए आंदोलन किया जाएगा। सरकार की मंशा को हम पूरा नहीं होने देंगे।

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गौरतलब है कि नर्मदा परियोजना भोपाल के क्रियान्‍वयन हेतु भोपाल नगर निगम सीमा में बिछाई जाने वाली पाईप लाइन एलाइमेंट में आने वाली ग्रेविटी मेन के लिए अहमदपुर से बापूवन, विधान सभा के पास तक 1100 मि.मी. व्‍यास की पंपिंग मेन बिछाए जाने में बाधित 355 विभिन्‍न प्रजाति के पेड़ों को काटा जा रहा है।

प्रगति प्रगति पेट्रोल पम्‍प के सामने के इलाके तक कुल 269 पेड़ों को काटा जा चुका है। स्‍थानीय विरोध के कारण आज पेड़ों के कटाई रोक दी गई। सरकार ने पाइप लाइन के बाधक व़क्षों को चिन्‍हत कर काटे जाने वाले पेड़ों पर नम्‍बर लिख दिए हैं।

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पेड़ों को काटने का काम वन संरक्षक राजधानी परियोजना प्रशासन भोपाल द्वारा किया जा रहा है। पेड़ों को काटने के बाद वन संरक्षण राजधानी परियोजना द्वारा पेड़ों की नीलामी भी की जाएगी। उल्‍लेखनीय है कि 1100 हरे भरे पेड़ों की कटाई की जाना पर्यावरणीय दृष्टि से अनुचित है।

नर्मदा के पाइप लाइन के लिए पेड़ों को काटने के अलावा कोई अन्‍य तरीका तलाशा जाना चाहिए। कम से कम शहर के अन्‍दर तो अन्‍दर के सड़कों के नीचे से भी पाइप लाइन डाली जा सकती है। ऐसा कहा जा रहा है कि इन पेड़ों के बदले चार गुना पेड़ लगाए जाऍंगें लेकिन क्‍या वे पेड़ इन पांच से बीस साल पुराने पेड़ों की भरपाई कर सकेंगे यह सवाल अब तक अनछुआ है।



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amit
Saturday, 18th Apr 2009, 16:04
यह बहुत बुरी खबर है। भोपालवासियों को इसके लिए लड़ना होगा।