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बच्चे से अपने रिश्ते बेहतर बनाने के लिए कुछ छोटी कोशिशें ही बड़ा बदलाव ला सकती हैं या फिर ऐसा कह लें कि कुछ दिखाने वाली कोशिशें आज जरूरी हो चली हैं, जिसमें अपनी बात को जाहिर करना जरूरी सा लगता है।

सकारात्मक शब्द और प्रयोग

बच्चों से बात करते वक्त हमेशा सकारात्मक शब्दों का उपयोग करें। उन्हें अनुशासन में रखने के लिए डांट-डपट ही जरूरी नहीं है, बल्कि प्यार से भी समझाकर किसी बात को मनवाया जा सकता है। आपके हिसाब से जो बातें कम जरूरी हैं, वही बातें बच्चों के लिए दिल से लगने वाली हो सकती हैं।

प्यार और जवाब जल्दी

बच्चे का मूड खराब होने, उसके नाराज होने की स्थिति में या सामान्य समय में भी उसे प्यार से दुलार करते हुए बात करें। ऐसे में आप उस कोड भाष का भी इस्तेमाल कर सकते हैं, जो सिर्फ आपके और बच्चे के बीच जन्मी है। इसे आपके अलावा कोई और नहीं जानता। हर रिश्ते की सीमा रेखा होती है और कोशिश करें कि आप भी इसका पालन कर पाएं। खासतौर से बच्चों के दोस्तों के सामने उनका खास ध्यान रखें।

उदाहरण पेश करें

खुद को घर और सार्वजनिक जगहों पर भी औरों से अलग पेश करने की कोशिश करें। बच्चों को इज्जत देते हुए अगर जरूरत पड़े तो ‘आय एम सॉरी’, ‘प्लीज’ और ‘थैंक यू’ जैसी बातें कहने में पीछे नहीं हटें। अगर आप ऐसा करेंगे तो मौका पड़ने पर बच्चे खुद ब खुद इस बात को याद रखकर दोहराएंगे।

अच्छी आदतें

अच्छी और बुरी आदतें शुरुआत में ही पड़ जाती हैं। हेल्दी रहने में सिर्फ सेहत और सफाई ही शामिल नहीं है, बल्कि दिमाग का भी स्वस्थ रहना बहुत जरूरी है, इसके लिए बच्चे को सामाजिक बनाएं, शिक्षा दें जिससे उसका शरीर व मस्तिष्क अच्छा विकास करे। अपने बच्चे को सबसे ज्यादा बढ़ावा आप ही देंगे।

इससे उसके आत्मविश्वास और फैसले लेने की क्षमता में इजाफा होता है। उसके अच्छे कामों की तारीफ जरूर करें। हफ्ते में एक बार ही सही, लेकिन बच्चों के साथ, बच्चों के लिए और उनके ही पसंदीदा काम में वक्त जरूर बिताएं।


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