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कहते हैं, ईश्वर हर जगह नहीं पहुंचा इसलिए उसने मां बनाई- जन्मदात्री भी, पालनहार भी। आप बच्चे हों या बड़े, महिला हों या पुरुष, मां के बारे में आपके मन में कोई प्रेरक बात होगी, मार्मिक उदाहरण होंगे या भावनात्मक सोच होगी। आपकी भावनाओं को लाखों लोगों तक पहुंचाने का जरिया बनेगा 10 मई (मदर्स-डे) का दिन। मां के बारे में जरूर लिखें- चाहे कविता, चाहे सच्ची कहानी या बनाएं पेंटिंग और हमें भेजें नौ मई तक। हमारा ईमेल आईडी है webeditor@bhaskarnet.com - संपादक