कोएलो मुख्यत: उस जादुई यथार्थवाद के लेखक माने जाते हैं, जिसकी शुरुआत लैटिन अमेरिका से हुई। कोएलो ने बेशक उस यथार्थवाद को एक ऐसी स्प्रिचुएलिटी के साथ जोड़कर देखा, जो वह आध्यात्मिकता नहीं है, जिसका ग्लोबलाइजेशन के इस दौर में अमेरिका से लेकर थाईलैंड तक बाजार गर्म है। कोएलो की कोई भी नई किताब आते ही किताबों की दुकानों के शेल्फ उसकी प्रतियों से पट जाते हैं।
कुछ ऐसा ही नजारा है उनकी नई किताब विनर स्टैंड्स अलोन का। यह किताब कई अर्थो में उनकी पुरानी किताबों से हटकर है, जिसका फलक फैशन और सिनेमा के जादुई संसार में फैला हुआ है। पूरा उपन्यास कैन्नेस फिल्म फेस्टिवल के चौबीस घंटे की अवधि में घटित होता है, जिसके साथ-साथ लेखक पात्रों के गुजरे जीवन की कहानी को फ्लैशबैक में सुनाता रहता है। पाओलो ने पहली बार ग्लैमर की दुनिया की चमक-दमक के पीछे छिपे अंधेरों में झांकने की कोशिश की है और एक ऐसी दुनिया निकालकर लाए हैं, जो कभी चौंकाती है, कभी रोमांचित करती है तो कभी डराती है।
इगोर, जो एक रशियन फोन एक्जीक्यूटिव है, अपने प्राइवेट जेट विमान से फिल्म फेस्टिवल में आया है। वह अपनी पत्नी इवा को ढूंढ रहा है, जो उसे छोड़कर जा चुकी है। इन चौबीस घंटों के दौरान उसे पाने की कोशिश में इगोर, जो वैसे तो बहुत भला आदमी है, कई हत्याएं करता है, इस उम्मीद में कि इवा उसके पास वापस लौट आएगी। इस डरावने और चमकीले कैनवास में और बहुत से चरित्र चमकते हैं और गुम हो जाते हैं। ग्लैमर के संसार की कई रहस्यमय कहानियां सुनाई देती हैं। कई चरित्र हैं। एक 25 साल की मॉडल है, जिसे इस रुपहले संसार में सिर्फ एक मौके की तलाश है।
कैन्नेस फिल्म फेस्टिवल को हम अक्सर टीवी पर देखते हैं। चमकते सितारों और मंच पर बिखर रही रौशनियों को। लेकिन पाओलो कोएलो हम उस मंच की रौशनी के परे लेकर जाते हैं। पर्दे के पीछे के संसार में, जहां जिंदगी बहुत कठिन है। कोएलो का कैमरा मंच पर चमकते लोगों के जीवन के स्याह पक्ष और उनके संघर्षो को शूट करता है। हमें मॉडलों, अभिनेताओं, निर्देशकों और प्रोड्यूसरों की जिंदगी की पर्दे के पीछे की तस्वीर दिखाई देती है। जिस तरह से कोएलो उनकी जिंदगी में घुसते हैं और उन्हें शब्दों में उतारकर सामने रख देते हैं, वह सब सच नजर आता है।
इस किताब में चार मुख्य चरित्र हैं। सब समय के थपेड़ों में छूटते चले जाते हैं। एक आखिरी विजेता ही समय की धारा के विपरीत भी आखिरी समय तक खड़ा रहता है। पाओलो के चरित्र हमेशा बताते हैं कि जीवन काले और सफेद दो रंगों का नहीं होता। इन दो रंगों के बीच में ढेर सारे ग्रे भी छिपे होते हैं। पाओलो का हर चरित्र अच्छा भी है और बुरा भी। वह नायक भी है और विलेन भी। इगोर एक भला आदमी है, लेकिन वही उपन्यास में एक सीरियल किलर बनकर किताब को सेंसेशनल भी बना देता है।
अपनी कहानी में वो एक सीधा इंसान नजर आता है, लेकिन इवा की नजर में वह संसार का सबसे दुष्ट प्राणी है। शायद जीवन भी ऐसा ही है। कोएलो के पास एक सुंदर पारे जैसी बहती हुई भाषा है। उनका वर्णन रोचक है। कहानी से ज्यादा कहानी को कहने का अंदाज बांधकर रखता है। किताब अपने समय और पाठकों से संवाद करती है। यही उसकी सफलता का कारण है।