नसबंदी नहीं, छोटा परिवार चाहते हैं वरुण, ब्रिटिश अखबार पलटा
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नसबंदी नहीं, छोटा परिवार चाहते हैं वरुण, ब्रिटिश अखबार पलटा

varunनई दिल्ली. पीलीभीत से भाजपा उम्मीदवार वरुण गांधी के लंदन से प्रकाशित एक अखबार में छपे इंटरव्यू में नसबंदी की कथित वकालत करने पर हुए विवाद के बाद अखबार ने यू टर्न ले लिया है। अखबार के संवाददाता ने भी कहा है कि वरुण ने जबरन नसबंदी की पैरवी नहीं की है।

इस बयान के बाद भाजपा भी वरुण से अलग-थलग दिखी और इसे वरुण की निजी राय बताकर बयान से पल्ला झाड़ लिया। भड़काऊ भाषणों के बाद वरुण इस बार अपने पिता दिवंगत संजय गांधी की नसबंदी की नीति की कथित वकालत करने के कारण विवादों में घिरे। हालांकि वरुण ने इनकार किया कि उन्होंने जबरन नसबंदी का पक्ष लिया है।

अखबार की सफाई

इंटरव्यू को लेकर ‘द डेली टेलीग्राफ’ के संवाददाता डीन नेलसन ने एक टीवी चैनल को स्पष्ट किया है कि वरुण नसबंदी के लिए आपातकाल के दौरान अपनाए गए जोर जबर्दस्ती के तरीके अपनाना नहीं चाहते। वे प्रोत्साहन देकर लोगों को छोटा परिवार रखने के लिए प्रेरित करना चाहते हैं।

वरुण के पिता संजय गांधी पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के उत्तराधिकारी माने जाते थे। उन पर ऐसी नीति लागू करने का आरोप लगाया जाता है, जिसके कारण सरकारी लक्ष्य पूरा करने के लिए हजारों पुरुषों और महिलाओं की जबरन नसबंदी की गई। नसबंदी के दौरान कुछ की मृत्यु भी हो गई।

और क्या कहा वरुण ने

इंटरव्यू में भाजपा नेता ने कहा कि जो भी ये कहता है कि वो कभी सत्ता हासिल नहीं करना चाहता वो झूठ बोलता है। पिछले दिनों पीलीभीत में भड़काऊ भाषणों केसंबंध में वरुण ने कहा कि उन्होंने मुस्लिमों के खिलाफ कोई टिप्पणी नहीं की थी। भाजपा नेता ने कहा कि असामाजिक तत्वों से स्थानीय लोगों के संरक्षण का संकल्प उन्होंने जरूर लिया था।

वरुण ने किया इनकार

वरुण ने जबरन नसबंदी की वकालत करने से इनकार किया है। भाजपा नेता ने कहा कि उन्होंने जबरन नसबंदी नीति लागू करने की कोई बात नहीं की। वरुण के मुताबिक उन्होंने शिक्षा, जागरूकता और प्रोत्साहनों के जरिए संवेदनशील परिवार कल्याण कार्यक्रम लागू करने का पक्ष लिया है।

इंटरव्यू पर विवाद

लंदन के ‘डेली टेलीग्राफ’ में प्रकाशित इंटरव्यू में वरुण के हवाले से कहा गया कि वे अपने पिता के पदचिन्हों पर चलना चाहते हैं और जनसंख्या नियंत्रण के लिए जबरन नसबंदी की नीति लागू करने के पक्ष में हैं। इसमें वरुण को यह कहते हुए बताया गया है कि वे जबरन नसबंदी की नीति के अलावा सभी के लिए सैनिक शिक्षा अनिवार्य करने संबंधी विधेयक लाने का प्रस्ताव भी करेंगे, जिससे देश में धार्मिक और जातिगत भेदभाव समाप्त हो सके।

भाजपा ने झाड़ा पल्ला

आपातकाल के दिनों में संजय गांधी पार्टी के निशाने पर रहे थे। उनके वक्तव्य की वरुण द्वारा कथित वकालत से भौचक्की भाजपा ने तुरंत अपने को इससे अलग कर लिया है। पार्टी ने इसे वरुण की निजी राय बताया है। भाजपा प्रवक्ता सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा, ‘वरुण ने जबरन नसबंदी को लेकर जो कुछ कहा है वे उनके निजी विचार हो सकते हैं। भाजपा, परिवार कल्याण को बढ़ावा देने के पक्ष में है लेकिन जबरन नसबंदी की नीति का समर्थन नहीं करती।’

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