मुंबई. एक ओर जहां देश पंद्रहवीं लोकसभा के अंतिम चरण के लिए वोट कर रहा है तो दूसरी ओर, देश का शेयर बाजार कल की शानदार गरमी के बाद थोड़ा नरम होकर दायरेबंद स्थिति में कारोबार कर रहा है। बाजार की इस स्थिति के लिए मुनाफावसूली को जिम्मेदार माना जा रहा है। हालांकि अब तक के रिकार्ड पर एक नजर डालें तो सामान्यत: यह देखा गया है कि मतदान के पहले बाजार ऊपर की ओर जाता है लेकिन मतदान के दिन बाजार में नरमी ही रहती है।
कांग्रेस-भाजपा बाजार के लिए अनुकूल
प्रधानमंत्री की कुर्सी पर किस दल का नेता बैठेगा, यह भी बाजार को दिशा देने में खासतौर पर काम करेगा। कांग्रेस और भाजपा, दोनों दलों को बाजार के लिए अनुकूल माना जाता है। इसमें से कोई भी दल सत्ता पर काबिज हो, बाजार को चढ़ने में मदद ही मिलेगी। लेकिन यदि तीसरा या चौथा मोर्चा सत्ता में भागीदारी करता है तो बाजार के लिए नकारात्मक रहेगा। हालांकि अब तक के रुझान कांग्रेस व उसके सहयोगी दल के पक्ष में दिख रहे हैं।
मतदान के पहले अच्छे संकेत
भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को सेंसेक्स में 475 अंक की उछाल ने 9 मार्च के बाद आई 50 फीसदी सुधार की रैली को नया आधार दे दिया है। राजनीतिक अनिश्चितताओं के बावजूद एफआईआई की 452 करोड़ रुपए की शुद्ध खरीद ने लार्जकैप शेयरों में जबर्दस्त गति पैदा की। बाजार ने औद्योगिक उत्पादन के कमजोर आंकड़ों को दरकिनार कर दिया। टेक्नोलाजी, आईटी, बैंकिंग, रीयल एस्टेट, टेलीकाम और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों के शेयरों में अच्छी खरीद दिखाई दी। बीएसई सेंसेक्स करीब 475 अंक की उछाल के साथ 12,000 का निशान पार कर गया। वहीं एनएसई निफ्टी में भी करीब 3.56 फीसदी की उछाल दिखाई दी। कोई स्पष्ट राजनीतिक तस्वीर सामने आने तक सेंसेक्स एक रेंज में चलता रहेगा।
क्या हुआ बाजार में?
बीएसई सेंसेक्स 11,629.97 पर खुलने के बाद 12,194.63 की ऊंचाई तक चला गया था। बाद में 12,158.03 पर बंद हुआ। सेंसेक्स में 475.04 अंक की उछाल थी, जो 4.07 फीसदी तेजी थी। एनएसई निफ्टी 3554.65 पर खुलने के बाद 3681.10 पर बंद हुआ, जो करीब 3.56 फीसदी की गिरावट दिखाई दे रहा था।