आयुर्वेदिक बुलेट प्रूफ जैकेट!
Elections 2009 Divya Bhaskar Business Bhaskar Indiainfo DNA 3Dsyndication MyFM Mera Mobi


आयुर्वेदिक बुलेट प्रूफ जैकेट!

पुणे। महाराष्ट्र के सांगली शहर में स्पोर्ट्स अकादमी चलाने वाले मकरंद काले ने आयुर्वेद की ताकत दिखाते हुए फलियों की मदद से बुलेट प्रूफ जैकेट बनाया है। यह न सिर्फ एके-47 रायफलों से निकली गोलियों के खिलाफ कवच का काम कर सकता है बल्कि कार्बाइन व बैरेट जैसी असाल्ट रायफलों से भी रक्षा कर सकता है।

‘द मकरंद आयुर्वेदिक बुलेट प्रूफ जैकेट’ का प्रदर्शन रविवार को पुणो की नेशनल केमिकल लेबोरेटरी में आयोजित एक दिवसीय वर्कशॉप में प्रदर्शित की गई थी। इसका आयोजन नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन (एनआईएफ) ने जमीनी स्तर के आविष्कारकर्ताओं के लिए किया था।

अपने जैकेट की चर्चा करते हुए काले बताते हैं, ‘मैं आयुर्वेद की ताकत बताना चाहता था। इससे मुझे फलियों की मदद से बुलेट प्रूफ जैकेट बनाने की प्रेरणा मिली।’ उन्होंने बताया कि जैकेट में एक किलोमीटर से अधिक रैंज वाली बैरेट असाल्ट रायफलों से जैसे अधिक घातक हथियारों का मुकाबला करने लायक सुधार किया गया है। काले के मुताबिक नवीनतम परिष्कृत जैकेट का वजन 2.1 किलोग्राम है। इसके विपरीत भारतीय सेना द्वारा इस्तेमाल किया जाना वाले परंपरागत बुलेट प्रूफ जैकेट का वजन नौ से 10 किलो के बीच होता है।

जैकेट का विकास 2003 में किया गया था और रक्षा शोध व विकास संगठन (डीआडीओ) की प्रयोगशालाओं में इसका परीक्षण भी किया जा चुका है। इसके लिए उन्हें 2007 में एनआईएफ की ओर से नेशनल अवॉर्ड भी मिल चुका है। जैकेट के लिए पेटेंट हासिल करने के प्रयास अंतिम चरणों में हैं।

काले गुजरात ग्रास रूट्स इनोवेशन आगमेंटेशन (जीआईएएन) की मदद से जैकेट के लिए अंतरराष्ट्रीय पेटेंट पाने का प्रयास भी कर रहे हैं। जीआईएएन गुजरात सरकार द्वारा समर्थित प्रौद्योगिकी आधारित व्यवसाय को बढ़ाने देने वाली क्षेत्रीय संस्था है।

कामर्स ग्रेजुएट काले सांगली में 16 साल से स्पोर्ट्स अकादमी चला रहे हैं। वे युवाओं को एथलेटिक्स, तैराकी और फुटबॉल का प्रशिक्षण देते हैं। इसके अलावा वे कमांडो ट्रेनिंग भी देते हैं और जासूसी का स्कूल भी चलाते हैं।






अपने विचार यहां लिखें:
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: