मुंबई। जलवायु परिवर्तन के कारण आने वाले पांच दशकों में गर्मी के दिनों में मुंबई का सामान्य तापमान बढ़कर करीब 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। जबकि समुद्र का जलस्तर 0.86 मीटर तक बढ़ने की आशंका है, जिससे समुद्र तट से लगे निचले इलाके डूब जाएंगे।
1901 से 2007 तक के मौसम से जुड़े आंकड़ों पर एक शोध करने के बाद यह आशंका जाहिर की गई है। क्षेत्रीय मौसम केंद्र के उप महानिदेशक आरवी शर्मा ने जलवायु परिवर्तन से जुड़ी यह रिपोर्ट सोमवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण को सौंपी।
शोधकर्ताओं ने पाया कि पिछली एक सदी में मुंबई का सामान्य तापमान 1.6 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ा है और अनुमान है कि अगले सात दशकों में इसमें 10 डिग्री सेल्सियस की और वृद्धि होगी। यह आकलन और अनुमान वैश्विक मॉडल और पिछले तीन दशकों में इकट्ठे किए गए आंकड़ों के अध्ययन पर आधारित है। आरवी शर्मा ने कहा, ‘हमने पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाया है। यही वक्त है जब लोगों को जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वॉर्मिंग के संभावित खतरों के प्रति सचेत हो जाना चाहिए।’
अध्ययन के मुताबिक, समुद्र का जलस्तर बढ़ने पर मुंबई में मैरीन ड्राइव, रेसकोर्स, मुंबई सेंट्रल स्टेशन और जुहू एयरपोर्ट जैसे इलाके जलमग्न हो जाएंगे। शर्मा ने कहा कि अगर ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन आज कम कर दिया जाए तो आने वाली पीढ़ी एक सामान्य जीवन बिता सकेगी।