फांसी के बजाय उम्रकैद देने पर अवधि की कोई सीमा नहीं
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फांसी के बजाय उम्रकैद देने पर अवधि की कोई सीमा नहीं

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने एक दुर्लभ फैसले में कहा है कि हत्या के किसी मामले में यदि अदालत मौत की सजा देना नहीं चाहती तो उम्रकैद की अवधि के लिए कोई सीमा नहीं है। अदालत यह स्पष्ट कर सकती है कि दोषी को जेल में कितने साल रहना होगा।

शीर्ष अदालत ने गुजरात की विशेष अदालत (टाडा) के आदेश को बहाल रखा। इस आदेश में प्रतिद्वंद्वी हंसराज त्रिवेदी गैंग के नौ सदस्यों की हत्या कराने वाले अब्दुल लतीफ अब्दुल वहाब शेख को जेल में कम से कम 20 साल गुजारने की सजा सुनाई गई थी। दोनों गैंग अपहरण, अवैध शराब, वसूली और जमीनों पर कब्जे के अपराधों में लिप्त थे।

अब्दुल लतीफ गैंग के पांच बदमाश 3 अगस्त 1992 को अहमदाबाद के जिमखाना में गए और वहां मौजूद हंसराज गैंग के सदस्यों पर गोलियां चला दीं, जिससे उनकी मौत हो गई। टाडा अदालत ने लतीफ को मुख्य अपराधी माना, लेकिन उसे मौत की सजा न सुनाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।



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