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दोस्तो, हंसने के मौके कभी भी, किसी भी मोड़ पर मिल सकते हैं और ऐसा मौका भूलों से भी मिल सकता है। जी हां, जब भूल होती है, तब तो अफसोस होता है, सीखने का मौका भी मिलता है लेकिन चंद साल बाद ये ही भूलें कभी-कभी हंसने पर भी मजबूर कर देती हैं। ऐसी ही चंद गलतियों पर गौर कीजिए, जो हुईं तो इत्तफाक से, पर थोड़ी महंगी भी पड़ीं..
कुछ सुना-सुना सा भाषण..
31 दिसंबर, 1986 का दिन था। रात होते ही लाखों जर्मन निवासी नववर्ष की पूर्व संध्या के अवसर पर राष्ट्रपति का संदेश सुनने के लिए अपने-अपने टेलीविजन के आगे जमा हो चुके थे। जब राष्ट्रपति हर्र वॉन विजसेकर का भाषण शुरू हुआ, तब कई लोगों को वह भाषण कुछ सुना-सुना सा लगा।
थोड़ी ही देर में सारी पोल खुल गई। बात यह थी कि यह वही भाषण था, जो राष्ट्रपति महोदय ने बीते नववर्ष की पूर्व संध्या पर दिया था। अगले दिन शाम को वहां के स्टेट चैनल -दो पर दर्शकों से माफी मांगी गई। हुआ यह था कि गलती से पिछले वर्ष का कैसेट दोबारा प्रसारित कर दिया गया था।
टाइपिस्ट की लिखाई और अमेरिका ने की भरपाई
अमेरिका के एक सरकारी विभाग के टाइपिस्ट को कुछ इस प्रकार टाइप करना था, ‘‘सभी विदेशी फल-पौधे कर से मुक्त हैं।’’ परन्तु टाइपिस्ट साहब ने गलती से यह पंक्ति कुछ इस तरह टाइप कर दी-‘‘सभी विदेशी फल, पौधे कर से मुक्त हैं।’’इस गलती का नतीजा यह हुआ कि जहां सिर्फ फल देने वाले विदेशी पौधे कर से मुक्त होने चाहिए थे, वहां सारे विदेशी फल और सारे विदेशी पौधे कर से मुक्त हो गए। जब तक गलती का पता चलता, अमेरिका को बीस लाख डॉलर का आर्थिक नुकसान हो चुका था।
मिलते-मिलते ऊंची-नीची हो गईं
अ मेरिका के शिकागो शहर और इलिनॉइज शहर को आपस में जोड़ने के लिए एक भूमिगत सुरंग बनाने का निर्णय लिया गया। प्रशासनिक कारणों से दोनों स्थानों पर अलग-अलग ठेकेदारों को यह काम सौंप दिया गया। एक ने शिकागो से सुरंग बनानी शुरू की तथा दूसरे ने इलिनाइॅज से।
पता नहीं निर्माण के दौरान इंजीनियरों से या गलती हुई कि जब ये सुरंगंे आपस में एक-दूसरे से मिलने के स्थान पर पहुंचीं, तब यह पता लगा कि एक सुरंग दूसरी से सीधी मिलने की अपेक्षा 20 सेंटीमीटर नीची है और दूसरी से सीधी मिलने की अपेक्षा 20 संेटीमीटर दूर भी है। इस गलती के कारण वहां के प्रशासन को तीन लाख डॉलर का नुकसान उठाना पड़ा।