वाराणसी की जनता ने भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी को जीता कर पूरे देश में यह मैसेज दिया है कि लोकतंत्र के सबसे बड़े महोत्सव में बाहुबलियों के लिए कोई जगह नहीं है।
वाराणसी में मुरली मनोहर जोशी का मुख्य मुकाबल बाहुबली मुख्तार अंसारी से था। इस धार्मिक नगरी में बीएसपी के द्वारा कुख्यात बाहुबली और कई आपराधिक मामलों की वजह से जेल में पड़े मुख्यार को उतारा था।
बसपा सुप्रीमो मायावती के भाजपा दिग्गज मुरली मनोहर जोशी से शुरू से ही अच्छे सम्बन्ध रहे हैं। भाजपा के अंदर राजनाथ से उनकी नहीं पटती पर जोशी और लालजी टंडन जैसे नेताओं से उनका हमेशा अच्छा तालमेल रहा। कई बार तो वह इन दोनों नेताओं की कलाई पर राखी बांध चुकी हैं।
बताया जाता है कि बसपा नेतृत्व ने जानबूझकर विवादास्पद चरित्र-मुख्तार को वाराणसी के मैदान में उतारा था। ताकि सामुदायिक ध्रुवीकरण आधारित चुनावी जंग में मुरली मनोहर जोशी को अगर लाभ मिल जाए तो एक तीर से दो निशाने सधेंगे। भाजपा में जोशी एक बार फिर ताकत बनकर उभरेंगे और राजनाथ के लिए चुनौती बनेंगे। भाजपा से बसपा के समीकरण बिगाड़ने में राजनाथ की हमेशा से अहम भूमिका रही है।