नई सरकार चुनते वक्त देश के ग्रह-नक्षत्र क्या कह रहे हैं? ज्योतिषी आश्वस्त हैं कि भारत कुछ ही वर्षो में अपने राष्ट्रीय और सांस्कृतिक गौरव को फिर हासिल करेगा। वह दोबारा सोने की चिड़िया होगा, लेकिन उससे पहले संघर्षो और कठिनाइयों के दौर आएंगे, उथल-पुथल हो सकती है। अंतत: भारत की पताका सारी दुनिया में फहराएगी।
व्यापक कुमार लोढ़ा
सितारे बताते हैं कि भारत बहुत जल्द अपनी प्राचीन छवि यानी सोने की चिड़िया की पदवी फिर से प्राप्त करेगा। 10.01.2010 तक राहु में सूर्य की अंतर्दशा देश के लिए अग्निपरीक्षा होगी। 09.09.2009 तक सिंह का शनि जैसे ही दशम भाव में प्रवेश करेगा, वैसे ही जन्म के मंगल-केतु-नैप्च्यून के साथ उसका घर्षण होगा।
शनि-मंगल की युति राजकीय उथल-पुथल, सामाजिक अशांति, प्राकृतिक और मानव जनित त्रासदियां सामने लेकर आएगी। 10 जनवरी 2010 तक जनता और सरकार को तलवार की धार पर चलना पड़ सकता है। इसके बाद 12.07.2011 तक राहु में चंद्र की अंतर्दशा भी उथल-पुथल मचाएगी।
13.07.2011 के बाद मंगल की अंतर्दशा में सत्ता युवा हाथों में होगी। इसी के साथ भारत स्वर्णिम दौर में प्रवेश करेगा। फिलहाल योग बताते हैं शुक्र प्रधान शख्स ही प्रधानमंत्री बनेगा। गौर करने वाली बात है कि स्वतंत्र भारत के चौथे स्थान में शनि एवं एक मई को दशम भाव में गुरु की उपस्थिति, इसके अलावा दशमांश कुंडली के लग्न में उच्च के शुक्र ने परिणामों को प्रभावित करने का काम किया है।
कुंडली से पता चलता है कि शुक्र की महादशा में केतु की अंतर्दशा एवं शनि की सूक्ष्म दशा 05.07.2009 तक रहेगी। 09.09.2009 से शनि राशि परिवर्तन करेगा और भारत सूर्य की महादशा में प्रवेश करेगा। इसके प्रभाववश 22.12.2009 तक हर विपरीत स्थिति का सामना करते हुए भारत 2015 तक विश्वमंच पर महाशक्ति के रूप में नेतृत्व प्रदान करेगा।
यही नहीं, इस दौरान भारत के अनेक शत्रुओं (पाकिस्तान प्रमुख रूप से) का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। ग्रह-सितारों की चाल के आलोक में भारत के आगामी पांच वर्षो के बारे में हम चर्चा करते हैं। 16 मई के चुनाव परिणामों में गुरु राहु (मकर राशि) का चांडाल योग, सिंह राशि का शनि, राहु-शनि का षडाष्टक एवं पाप ग्रहों का प्रभाव इस देश की जनता और नेताओं को जकड़ कर रखेगा।
राहु के कारण किसी को पूर्ण बहुमत नहीं मिलेगा। चांडाल योग की वजह से सत्ता का समीकरण भी गुरु, राहु की तरह होगा। इसी वर्ष 7 जुलाई को सदी का सबसे बड़ा सूर्यग्रहण पड़ रहा है, जो स्वतंत्र भारत की कुंडली में तृतीय स्थान (जो पराक्रम, बंधुत्व, आस-पड़ोस, विदेश स्थान का होता है) और भारतीय गणतंत्र की कुंडली में अष्टम स्थान (प्लूटो का स्थान) पर होगा, जो बेहद अशुभ है।
इसकी वजह से प्राकृतिक, आर्थिक परिवर्तन एवं अन्य घटनाएं सामने आने लगेंगी, किंतु गुरु एवं शुक्र की स्थिति बचाव भी करती रहेगी। प्रकृति का नियम है कि कुछ अच्छा देखने से पहले बुरा देखना पड़ता है। राहु शतरंज के शह-मात का खेल तेजी से खेलेगा, लेकिन सूर्य और वजीर मंगल इसका सख्ती से मुकाबला करेंगे।
देश में 17.12.2010 से 22.09.2011 तक राजनीतिक अफरातफरी रहेगी। इस देख युवा आंदोलन उभरेगा और देश चुनाव की और पुन: बढ़ेगा। 31.10 2011 से 11.07.2012 गुरु की अंतर्दशा में जनता एकतरफा निर्णय कर किसी युवा को नेतृत्व सौंपेगी।
इसके साथ ही युवा वर्ग विद्यमान बुराइयों को साफ करते हुए आगे बढ़ेगा, जो 04.09.2012 से 05.08.2013 (शनि की अंतर्दशा) में शत्रुओं का सफाया कर विश्व को अचंभित करने का काम करेगा। दूसरी ओर पश्चिम यानी यूरोप, अमेरिका निराशा व हताशा से दुखी होकर आध्यात्मिकता की ओर बढ़ेंगे। सूर्य की महादशा में भारत का प्रचंड प्रकाश संपूर्ण विश्व को प्रकाशमान करेगा।
कम होगा भ्रष्टाचार
पं. जयगोविंद शास्त्री
स्वतंत्र भारत की कुंडली में 30 जुलाई 2004 से मारकेश मंगल की महादशा चल रही है, जो जुलाई 2011 तक रहेगी। इसमें लग्नेश शुक्र की अंतर्दशा 30 मई 2009 से प्रारंभ हो रही है। शुक्र जन्मकुंडली में लग्नेश है और इस वर्ष संवत् 2066 के राजा भी हैं।
इसकी वजह से भारत में मंदी का असर कम पड़ेगा। मारकेश के बावजूद लग्नेश शुक्र की अंतर्दशा भारत के लिए लाभप्रद रहेगी। जुलाई 2011 से 18 वर्ष के लिए भारत पर अनंत नामक कालसर्प योग का दुष्प्रभाव शुरू हो जाएगा।
राहु अपनी ही अंतर्दशा यानी जुलाई 2011 से मार्च 2014 तक राजनीति के लिए कष्टकारी रहेगा। कई राजनेताओं पर संकट आ सकता है, राज्यों में सरकारें बदल सकती हैं। 9 सितंबर के बाद वृष लग्न के लिए राजयोग कारक शनि वृष लग्न में चतुर्थ सुख भाव से पंचम तथा चंद्र और सूर्य कुंडली से तृतीय पराक्रम भाव में आएंगे। आने वाले समय में शनिदेव देश की रक्षा करेंगे और भ्रष्टाचारियों को दंडित भी करेंगे।
भवन पर जन्म का राहु एवं चलित में गुरु का प्रवेश राहुल के भाग्य को प्रभावित करेगा। मेहनत के सापेक्ष सफलता उन्हें नहीं प्राप्त होगी, लेकिन स्थिति इतनी बुरी नहीं है। 15 मई तक सूर्य मेष के जन्म के शनि के ऊपर चल रहा था किंतु 9.9.09 में चतुर्थ में शनि के आने के बाद वे जबरदस्त ताकत के साथ राजनीति में एक नई हलचल पैदा करेंगे एवं युवा वर्ग का प्रतिनिधित्व करेंगे। आने वाला समय उनके लिए पुरुषार्थ लेकर आएगा।
वृश्चिक लग्न के वरिष्ठ भाजपा नेता को दशम में सिंह के शनि एवं पराक्रम में राहु का षडाष्टक एवं चांडाल योग ने अति महात्वाकांक्षी बना डाला है, जिसके नतीजे सामने आएंगे। यही नहीं, शनि की महादशा में शनि का अंतर उनके स्वास्थ्य एवं सुरक्षा की दृष्टि से अच्छा नहीं है।
9.9.09 के बाद शनि के ग्यारहवें भाव में आ जाने से वे राजनीति के हाशिए पर आ जाएंगे। इस लिहाज से कह सकते हैं कि उनके लिए यह समय अत्यंत अशुभ है।
साझा सरकारों का दौर खत्म
डॉ. राम नरेश त्रिपाठी
भारत वर्ष का प्राचीन नाम आर्यावर्त है, जो विश्व के सात द्वीपों में से जम्बो द्वीप के अंतर्गत आता है। ‘भ’ का अर्थ प्रकाश अथवा ज्ञान है और ‘रत’ से तात्पर्य संलग्न रहने से है। सूर्य ज्ञान का प्रतीक है तथा ज्योतिष शास्त्र में वामन तारा और गृहराज की मान्यता प्राप्त है।
११ सितंबर २क्क्९ तक भारत की शुक्र महादशा रहेगी इस दशा में भारत की आर्थिक प्रगति एवं महिलाओं का वर्चस्व बढ़ेगा। ११ सितंबर २क्क्९ से भारत की सूर्य महादशा आरंभ होगी जो २क्१५ तक चलेगी। सूर्य मित्र चंद्र के घर में बैठ कर भारत की कीर्ति पताका विश्व में फहराएगा।
२क्१क्, २क्११, २क्१२ तथा २क्१३ की वर्ष कुंडलियों के आधार पर स्पष्ट कहा जा सकता है कि सूर्य भारत के वैभव तथा सम्मान को काफी ऊंचाई तक ले जाएगा। इस अवधि में साझा सरकारों का दौर समाप्त हो सकता है। ज्योतिषीय गणना के क्रम में २ साल २ महीने के बाद प्रधानमंत्री भले ही बदल जाए पर सरकार स्थिर रहेगी।
विकास में किसी तरह की रुकावट नहीं आएगी। आर्थिक, सामरिक एवं शैक्षिक विकास विश्व स्तर पर होगा। राहु-शनि-मंगल आतंकवाद तथा विस्फोटों के जनक बने रहेंगे। पाकिस्तान का जन्म १४ अगस्त १९४७ २२:३क् बजे मेष लग्न में हुआ। मंगल, राहु-सूर्य-शनि के मध्य होने से पराक्रम एवं राज्य भाव दोनो को पीड़ित करता है।
मनमोहन सिंह की कुंडली की ग्रह दशा के अनुसार वे प्रधानमंत्री बन सकते हैं, लेकिन ग्रहों की चाल से यह भी प्रतीत होता है कि मनमोहन सिंह का हृदय परिवर्तन हो सकता है और उनकी राजनीति से संन्यास लेने की संभावना उभर सकती है, क्योंकि द्वितीय भाव पर जन्म के शनि के ऊपर राहु, गुरु का भ्रमण, भाग्य भवन पर जन्म के गुरु का भ्रमण है। ये ग्रह स्थितियां उन्हें ऐसा कदम उठाने के लिए प्रेरित कर सकती हैं।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की कुंडली में चलित में शनि उन्हें चाणक्य की भूमिका अदा करने का मौका दे रहा है एवं दशम सत्ता स्थान पर तृतीय पराक्रम उच्च दृष्टि से एवं भागीदार स्थान को स्वग्रही दृष्टि से देख रहा है। नितीश कुमार की मन की बात जानने में सभी असफल हो जाएंगे। गुरु का चलित में सूर्य के साथ अंगारक योग एवं राहु के साथ चांडाल योग से ऐसा प्रतीत होता है कि मित्रांे से धोखा मिल सकता है।
थपेड़ों के बीच राष्ट्र बढ़ेगा
पं. बाबूलाल जोशी
लगभग एक माह बाद यद्यपि शुक्र की 20 वर्षीय महादशा केतु के अंतर के साथ 15.09.09 को समाप्त हो जाएगी, फिर भी शुक्र के नेतृत्व प्रभाव में रहने से सत्तापक्ष के निर्माण में महिला की भूमिका के साथ आगामी समय में लोकतांत्रिक व्यवस्था प्रणाली में परिवर्तन आएगा।
भौतिक संसाधनों, विलासी प्रवृत्तियों के बढ़ते असर भी दिखाई देंगे। भारत की पत्रिका में शनि भाग्येश और कर्मेश (राज्येश) होकर अस्त स्थिति में पराक्रम भाव में सूर्य तथा चंद्र के अलावा बुध और लग्नेश शुक्र (अस्त स्थिति) से युति किए हुए है।
अत: कर्म और राजकीय स्थिति से भारत की उन्नति धीरे-धीरे होगी। हालांकि शनि की भवांश कुंडली में लाभ भाव में स्व नवांश में उपस्थिति होने से तथा नवांश में विपरीत राजयोग रहने से भारत का कार्य स्थायी रहेगा। राजकीय व्यवस्था को थपेड़ों से गुजरना पड़ेगा।
आगामी संवत 2067 में मंगल के प्रधानमंत्रित्व के साथ मंत्री पद बुध को मिल रहा है जिसके परिणाम स्वरूप 16 मार्च 2010 से भारी जन-धन हानि जैसे संकटों से देश को गुजरना पड़ेगा तो बुध के मंत्री रहने से भारत में आर्थिक सुदृढ़ता व विलासिता में भी वृद्धि होगी।
4 अप्रैल 2011 से विक्रम संवत 2068 चंद्रमा के नेतृत्व व बृहस्पति के प्रभाव से पर्याप्त जल वृष्टि के साथ धन-धान्य की प्रचुरता के होते हुए भी क्रोधी नाम का संवत्सर रहने से वाद-विवाद की स्थितियां भी बनती रहेंगी। 23 मार्च 2012 को शुक्र ग्रह के नेतृत्व में प्रधानमंत्री और मंत्री पद दोनों रहने से खाद्यान्नों में प्रचुरता की स्थिति बनेगी, परंतु धान्येश शनि के रहने से कुछ स्थानों पर अकाल का सामना करना पड़ सकता है।22 जुलाई 2009 को खग्रास सूर्य ग्रहण अद्भुत रहेगा। 15.09.09 से सुखेश सूर्य की 6 वर्षीय महादशा में व्यापक बदलाव देखने में आएंगे। पाकिस्तान की छिन्न-भिन्न स्थिति भी दिखाई देगी। शैक्षणिक उन्नति, रोजगार के नए आयाम स्थापित होंगे। इसकी वजह से भारत विश्व मानचित्र में प्रतिष्ठित होगा।
शरद पवार की कुंडली में शनि की महादशा में शुक्र की अंतर्दशा है। दशमांश में शनि एवं शुक्र पंचम भाव में है एवं शनि चंद्र से दुष्ट होते हुए भी शत्रु पर शक्तिशाली योगकारक बन गया है। वहीं दशमांश में सूर्य-शनि आमने-सामने आने से बहुत ऊंचे पद पर ले जाएगा। वे राजनीति में जबरदस्त धमाका करने की क्षमता रखते हैं।
बढ़ेगा स्त्रियों का प्रभाव
कविता चैतन्य
देश की जन्म कुंडली में मंगल, कुटुंब भाव (धन स्थान) में है। वृष लग्न के लिए अकारक होने के फलस्वरूप यह गठबंधन राजनीति को बढ़ावा देता रहेगा। कोई भी पार्टी अंदरूनी कलह से अछूती नहीं रहेगी। कुंडली में धन भाव मंगल तथा व्यय भाव पर शुभ ग्रह बृहस्पति की दृष्टि से निर्यात बढ़ेगा, जिससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि होगी।
मंगल की महादशा में शुक्र की अंतर्दशा 30.05 2009 से प्रारंभ हो रही है, जिसके फलस्वरूप राजनीति एवं समाज के हर क्षेत्र में स्त्रियों का प्रभाव एवं वर्चस्व रहेगा और वे उच्च पदों पर आसीन होंगी। भौतिक व विलासिता के कारक शुक्र से अमीर-गरीब की खाई और बढ़ेगी।
देश में भोगवादिता, धनलोलुपता, बेईमानी, भ्रष्टाचार आदि की प्रवृत्ति बढ़ेगी। 30 जुलाई 2010 से मंगल की महादशा में सूर्य की अंतर्दशा प्रारंभ होगी। सूर्य चतुर्थेश होकर तृतीय भाव में बैठे हैं, साथ ही 9 सितंबर से वृष लग्न के लिए योगकारक शनि गोचर द्वारा चंद्र कुंडली से तृतीय भाव में आ जाएंगे, जिससे देश की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।
कुंडली में चंद्रमा पराक्रम भाव को मजबूत कर रहा है, अत: इसकी अंतर्दशा में देशहित के लिए किए गए प्रयास सफल होंगे। जहां तक राहु की महादशा का सवाल है, तो यह जब 6 जुलाई 2011 से शुरू होगी तो कुछ आपदाएं और गलत नीतियों के परिणाम जनता को भुगतने पड़ सकते हैं।
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