नई दिल्ली
चुनाव के नतीजे आने के एक दिन पहले ही भारतीय शेयर बाजार में 300 अंकों के सुधार ने दिखा दिया था कि भारतीय कारोबारी आखिर मुल्क की जनता से क्या उम्मीदें कर रहा है। उस पर देश का मतदाता खरा उतरा। उसने आर्थिक स्थिरता के लिए एक ऐसा जनमत दिया है, जिससे पैदा होने वाली सरकार हर मोर्चे पर साहसिक निर्णय ले सकती है।
नई सरकार से उम्मीदें है कि वह सुस्त पड़ते वाहन और रीयल एस्टेट उद्योग में जान फूंकेगी, बीमा और पेंशन के सुधार अमल में लाएगी, तरलता का संकट दूर होगा, रोजगारों का सृजन होगा।
बीमा सुधार:
अब यूपीए सरकार के साथ वामपंथी बोगी नहीं होगी। बीमा उद्योग को उम्मीद है कि नई सरकार विदेशी निवेश की सीमा बढ़ाकर 49 फीसदी करने का विधेयक ला सकती है। एफडीआई की सीमा बढ़ाने के लिए बीमा कानून में संशोधन करना होगा। स्थाई समिति की सिफारिशें आने के बाद इसे आगे बढ़ाया जाएगा। पहले वामपंथी दल इसका कड़ा विरोध कर रहे थे। मेटलाइफ इंडिया के एमडी राजेश रेलान का कहना है कि नई सरकार से उम्मीद है कि वह बीमा सुधारों को आगे बढ़ाएगी।
नियोजन की प्रक्रिया:
ग्यारहवीं योजना (2007-12) की बची हुई अवधि में नियोजन की प्रक्रिया निर्बाध चलती रहेगी। मोंटेक सिंह अहलूवालिया के वित्त मंत्री बनने की स्थिति में उपाध्यक्ष नया हो सकता है और योजना आयोग की शक्ल भी बदल जाएगी लेकिन अभिजीत सेन का कहना है कि चुनाव के नतीजे जनता में भारी उत्साह पैदा कर सकते हैं।
निर्यात को चाहिए रियायतें:
दुनिया के आर्थिक धीमेपन के कारण निर्यातकों को काफी कठिनाई का सामना करना पड़ा है। भारत के निर्यात में भी तेजी से कमी आई है। भारतीय निर्यातकों में कपड़ा, रेडीमेड गारमेंट, चमड़ा उत्पाद, हीरा व जेवरात जैसे कारोबार प्रभावित हुए। इनमें काफी रोजगार भी घटे।
पीएसयू की हिस्सेदारी बिकेगी:
जब वामपंथी दलों की सरकार में भागीदारी नहीं होगी तब नई सरकार के लिए सरकारी कंपनियों की हिस्सेदारी बेचने का भी अच्छा मौका होगा। कई सरकारी कंपनियां शेयर बाजार में अपने पब्लिक इश्यू लेकर आ सकती हैं। कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में कहा है कि वह सरकारी कंपनियों की हिस्सेदारी जनता को देना चाहती है।
हालांकि सरकार के पास इसकी बहुल हिस्सेदारी रहेगी। शेयर बाजारों में जिस तरह से सुधार दिखाई दिया है, पूरी उम्मीद है कि सरकारी कंपनियां शेयर बाजार में उतरेंगी।
शेयर बाजार की छलांग
शेयर बाजार 9 मार्च के बाद से करीब 50 फीसदी सुधर चुका है। विदेशी निवेशकों ने लगातार निवेश बढ़ाया है, जिसका असर बाजार में दिखाई दे रहा है। लेकिन जिस तरह से यूपीए सरकार के लिए बहुमत मिला है, यह उम्मीद से परे है। बाजार पूरी उम्मीद कर रहा है कि कई क्षेत्रों में नई सरकार तेजी से सुधार कार्यक्रम तेज करेगी। अब चुनाव के नतीजों से शेयर बाजार के चौंकने की बारी है।
कहां रखें नजर?
बैंकिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, टेलीकाम और रीयल एस्टेट के शेयरों में अच्छी तेजी दिखाई दे सकती है। बुनियादी ढांचे में जीएमआर और जीवीके, लार्सन एंड टुब्रो, जेपी एसोसिएट्स। रीयल एस्टेट और व्यावसायिक संपत्ति वाली कंपनियों के शेयरों में सुधार।सरकारी बैंकों में एसबीआई, आईडीबीआई बैंक, एचडीएफसी आदि। बैंकिंग शेयरों में अभी एफआईआई की लिमिट पूरी नहीं हुई है।
किससे रहें सतर्क?
टेक्नोलाजी, आयल एंड गैस, फार्मा और एफएमसीजी कंपनियों के शेयरों में धन लगाते समय सतर्कता बरतें। अच्छी कंपनियों का ही चुनाव करें।
टैक्स रियायतें बनी रहें
उत्पाद शुल्क में कटौती को बरकरार रखना चाहिए। उन्हें वापस नहीं लेना चाहिए।
—राजीव कुमार, आईसीआरईएआर
सर्विस टैक्स और उत्पाद शुल्क में जो कटौतियां की गई हैं, उन्हें वापस नहीं लेना चाहिए। देश जल्दी ही जीएसटी व्यवस्था में जाएगा। उत्पाद शुल्क जीएसटी से ज्यादा नहीं हो सकता।
—महेश पुरोहित, अर्थशास्त्री
मंदी के हालात में सरकार ने जो भी रियायतें दी हैं, वे पर्याप्त नहीं हैं। विकास दर खराब नहीं है लेकिन अच्छी भी नहीं है। बेरोजगारी पर ध्यान देना चाहिए भले ही उसके लिए कोई भी पैकेज देने पड़ें।
—मेघनाद देसाई, अर्थशास्त्री
और राहत पैकेज के लायक राजकोषीय स्थिति नहीं है। लेकिन इसे नीतिगत बदलाव के तौर पर लाया जा सकता है। प्रत्यक्ष करों में बदलाव हो और कंपनियों के निवेश को प्रोत्साहित करें।
—नितिन देसाई, अर्थशास्त्री