नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक मामले में कहा कि किसी भी बालिग लड़की को अपने पसंद के लड़के से शादी करने का अधिकार है। उसके अभिभावक और परिजन उसे ऐसा न करने के लिए डरा धमका नहीं सकते।
शीर्ष कोर्ट ने यह टिप्पणी जम्मू-कश्मीर के रामबाण जिले की चंचली देवी के मामले में की। चंचली ने 2007 में धर्म पर्वितन कर अपने पड़ोसी फयाज अहमद अहंगेर से शादी कर ली थी। लेकिन उसके माता-पिता और दर्शन सिंह नाम के व्यक्ति ने शिवसेना के स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर उसे डराना धमकाना शुरू कर दिया था। इसकी वजह से फयाज को मेहवेश अंजुम (धर्म परिवर्तन के बाद चंचली का नाम) को लेकर श्रीनगर रहने जाना पड़ा।
घरवालों ने पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई, जिसमें आरोप लगाया कि अंजुम का अपहरण किया गया है। इसके आधार पर फयाज के दो भाइयों को गिरफ्तार कर लिया गया। फयाज ने जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट में एफआईआर रद्द करने के लिए याचिका लगाई, लेकिन कोर्ट ने इसे यह कहते हुए ठुकरा दिया कि वह पुलिस की जांच में हस्तक्षेप नहीं करेगी। फयाज ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की।
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस मरकडेय काटजू और जस्टिस दीपक वर्मा की अवकाशकालीन बेंच ने कहा कि भारत जैसे स्वतंत्र देश में हरेक बालिग व्यक्ति को अपने जीवन का फैसला करने का अधिकार है। जस्टिस काटजू ने कहा कि अगर बेटी के कदम से माता-पिता नाखुश हैं तो वे उससे संबंध तोड़ लें, लेकिन उसे डरा धमका नहीं सकते।
बेंच ने अंजुम की उम्र की पुष्टि करने के लिए फयाज के वकील को उसे कोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया है। श्रीनगर में रह रही अंजुम अगले एक-दो दिन में कोर्ट में पेश हो सकती है।