प्रोजेक्ट तैयार, पैसा नहीं
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प्रोजेक्ट तैयार, पैसा नहीं

हमीरपुर. वन विभाग में बजट के अभाव के चलते 14 लाख के काम अटके हुए हैं। प्रोजेक्ट तैयार होने के बावजूद इन पर काम शुरू करने के लिए पैसा स्वीकृत होकर नहीं आ रहा है।

जानवरों के हमलों में घायल हुए लोगों को मुआवजा राशि अदा करने के लिए पिछले करीब तीन सालों से क्लीयरेंस राशि मांगी जा रही है। लेकिन पूरा बजट नहीं दिया जा रहा है। विभाग के साथ लोग भी इस पैसे का मुंह ताक रहे हैं। ऐसे में पेंडिंग केसों की तादाद हर साल बढ़ रही है।

किन कामों के लिए चाहिए पैसा

वन विभाग ने जिला की पांच वन रेंजों के तहत पड़ने वाले जंगलों में आवाजाही की बेहतर सुविधा के लिए कुछ खस्ताहाल सड़कों की मरम्मत करनी है। इसके लिए दो लाख का बजट चाहिए है। पैसा नहीं आने से इनकी मरम्मत नहीं हो पा रही है। करीब आधा दर्जन पुराने भवनों की मरम्मत के लिए भी बजट चाहिए है।

चीड़, खैर सहित कई प्रजातियों के पौधों की नर्सरियां तैयार करने के लिए 6 लाख रुपए का बजट चाहिए। पौधों की डिमांड आ रही है। मगर इस काम को पूरा करने के लिए पैसे नहीं आ रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में जानवरों के हमलों में घायल लोगों को विभाग ने मुआवजा राशि अदा करनी है।

इसके लिए 4 लाख रुपए का बजट चाहिए है। करीब दो दर्जन मामलों में यह चैक वितरित किया जाना है। लेकिन यहां भी बजट की तंगदिली आड़े आ रही है। छोटी-छोटी राशि के लिए प्रभावितों को विभाग के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। समस्या का समाधान नहीं किया जा रहा है।

मेडिकल टीए बिलों के लिए भी बजट नहीं

विभाग में पिछले तीन सालों से पेंशन भोगियों और सेवारत कर्मचारियों की साढ़े 8 लाख रुपए के मेडिकल और टीए बिलों की पेंडेंसी के लिए भी बजट नहीं आ रहा है। बजट की मंदी से यह दोनों वर्ग भी परेशानी झेल रहे हैं। बजट प्रपोजल में जितनी राशि डाली जाती है उससे कहीं कम राशि मिलती है।



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