नई दिल्ली.
आधुनिक दौर के प्रमुख भारतीय नाटच्य लेखकों में विजय तेंदुलकर एक ऐसा नाम था जिन्होंने शांतता अदालत चालू आहे घासीराम कोतवाल और सखाराम बाइंडर जैसे नाटकों के जरिए ¨हसाग्रस्त समाज की नंगी सचाइयों को पेश कर भारतीय रंगमंच को नया मिजाज दिया।
कहानीकार पाकार पटकथा लेखक नाटच्य लेखक अनुवादक के तौर पर तमाम विधाओं में लिखने वाले मराठी के इस रचनाकार ने अपने पात्रों को हमेशा ¨जदगी से उठाना पसंद किया। उनकी रचनाओं में समाज के विरोधाभासों और विसंगतियों को सशक्त ढंग से उठाया जाता है।
महाराष्ट्र के कोल्हापुर में छह जनवरी 1928 को जन्मे विजय धोंडोपंत तेंदुलकर को घर के वातावरण से लेखन की चसक लगी। उन्होंने महज छह साल की उम्र में एक कहानी लिखी और 11 साल की उम्र में एक नाटक का लेखन कर स्वयं उसका मंचन एवं निर्देशन किया।
उनका लिखा पहला चर्चित नाटक श्रीमंत था जिसमें एक गर्भवती महिला की पी़डा को पेश किया गया है। मराठी रंगमंच में 1950 और 1960 के दशक में जो नये दौर की बयार बही समीक्षकों के अनुसार उनमें तेंदुलकर के नाटकों की बड़ी भूमिका है।
उस दौर में श्रीराम लागू मोहन अगाशे और सुलभा देशपांडे जैसे फनकारों ने तेंदुलकर के नाटकों के जरिये मराठी रंगमंच को नई संवेदना प्रदान की।