Science Tech Science Tech सूरज तप रहा है तो धरती तप रही है। इस ताप से भीषण गर्मी पड़ रही है। सूर्य का यह ताप कैसे बढ़ता है? सूर्य क्या है? किससे बना है यह? कैसे यह गर्म होता है? आइए ऐसे ही कुछ दिलचस्प सवालों के जबाव ढूंढने की कोशिश करते हैं:
क्या है सूर्य? विश्वास करें या नहीं, सूर्य सिर्फ एक तारा भर है। वैसा ही एक तारा, जो हम रात के समय आकाश में टिमटिमाते देखते हैं। यह धरती के इतना नजदीक है कि इतना बड़ा और चमकीला नजर आता है। इससे धरती पर पहुंच रहा ताप हमें गर्मी महसूस कराता है। वैज्ञानिक रात को टिमटिमाने वाले उन तारों के बारे में जानते हैं।
इन तारों की सूर्य से तुलना की जाए तो सूर्य वास्तव में इनसे औसत ही है। रात के अंधेरे में आकाश में टिमटिमाने वाले नन्हे तारे वास्तव में हमारे सूर्य से भी काफी बड़े हैं। इनमें से कुछ बेहद गर्म हैं तो कुछ इतने ठंडे और मद्धम हैं कि हम उन्हें मुश्किल से ही देख पाते हैं। लेकिन हम धरती वासियों के लिए सूर्य एकदम सही तारा है।
किससे बना है सूर्य? सूर्य गर्म गैसों से बना है। इनमें से कई में वह मैटेरियल है जो धरती पर भी मिलते हैं। इन मैटेरियल्स को ऐलीमैंट्स कहते हैं, इनमें हाइड्रोजन, हीलियम, कैल्शियम, सोडियम, मैग्नीशियम, आयरन शामिल हैं। क्या आप जानते हैं कि हमारे शरीर में पाए जाने वाले अणुओं से ही यह तारे भी बने हैं।
आकार हमारे निकटस्थ तारा विशाल है। आकाश में दमकता सूर्य छोटा इसलिए दिखाई देता है क्योंकि यह हमसे करीब 15 करोड़ किलोमीटर दूर है। इसके मुकाबले धरती नन्ही सी है। धरती करीब 13,000 किलोमीटर चौड़ी है तो सूर्य का घेरा 14 लाख किलोमीटर है। इसका मतलब है कि अगर सूर्य खाली गोला होता तो इसमें करीब दस लाख धरतियां समा सकती थीं।
कितना भारी है सूर्य? हालांकि हम सूर्य का वजन नहीं तोल सकते, लेकिन इसके अन्य वस्तुओं पर प्रभाव के अध्ययन से गणना करने पर हम इसका वजन पता लगा सकते हैं। सूर्य का वजन हमारी धरती से तीन लाख गुणा ज्यादा है और इसकी गुरुत्वाकर्षण शक्ति भी ज्यादा है। कोई बच्च अगर धरती पर 75 पाउंड का होगा तो वह सूर्य पर करीब एक टन का होगा।
कितना पुराना है सूर्य? हमारा सूर्य की उम्र करीब साढ़े चार साल अरब है। इसकी उम्र अभी पांच अरब साल और है। इसके बाद यह वर्तमान में जल रहे हाइड्रोजन को छोड़ना शुरू कर देगा और एक नए चरण में प्रवेश कर जाएगा।

इस चरण के दौरान सूर्य हीलियम को जलाना शुरू कर देगा और अपने वर्तमान आकार से करीब सौ गुणा ज्यादा फैल जाएगा तथा भयावह लाल दैत्य (रैड ज्यांट) बन जाएगा। एक बार जब इससे हीलियम गैस खत्म हो जाएगी, यह भी ध्वस्त होकर नन्हे सफेद बिंदु (व्हाइट डवार्फ) में बदल जाएगा।
कितना गर्म है सूर्य? सूर्य बेहद गर्म है। इस तारे के मध्य में तापमान कम से कम एक करोड़ डिग्री है। सूर्य की सतह (जिसे हम देखते हैं) का तापमान सिर्फ 5800 डिग्री ही है। यह सूर्य के लिए ठंडा है, लेकिन यह उबलते पानी से करीब 16 गुणा ज्यादा गर्म है।
सूर्य की बाहरी सतह (जिसे हम अपनी आंखों से नहीं देख पाते) बेहद गर्म अर्थात् करीब 15 से 20 लाख डिग्री है। तापमान में यह परिवर्तन वैज्ञानिकों के लिए बेहद रोचक है।
कितना खतरनाक है सूर्य? सूर्य की ओर कभी सीधे नहीं देखना चाहिए, सन ग्लासेज से भी नहीं। मानव की आंख इतनी चमकीली चीज देखने के लिए नहीं बनी है। सूर्य इतना चमकीला है कि यह हमें कुछ ही सैकेंड्स में अंधा कर सकता है। सूर्य हानिकारक अल्ट्रावॉयलैट (यूवी) रेडिएशन भी छोड़ता है। इससे त्वचा और आंखों को नुकसान पहुंच सकता है।
अध्ययन क्यों सूर्य का? बिना सूर्य के धरती पर जीवन संभव नहीं है। इसके बिना हमारा ग्रह एक जमी हुई अंधेरी गेंद जैसा होगा। हमें सूर्य की जरूरत प्रकाश, ऊष्मा और ऊर्जा के लिए है। सूर्य का बाहरी परिवर्तन ना केवल हमारे दैनिक जीवन और मौसम पर प्रभाव डालता है, बल्कि हमारे दूरसंचार जैसे कि उपग्रह, पर भी इसका प्रभाव पड़ता है। इसके अलावा सूर्य के बारे में ज्यादा से ज्यादा सीखने से हमें ब्रrांड के बारे भी पता चलेगा।
क्या है ध्रुवप्रभा? ध्रुवप्रभा (ऑरोरा) रंग-बिरंगा और चलंत प्रकाश है, जो ध्रुवों के निकट रात मेंआकाश में फैलता नजर आता है। ध्रुवप्रभा बनने का कारण भी सूर्य है। सूर्य से आने वाले ऊर्जात्मक तत्वों के कारण यह बनती है। सूर्य बेहद सक्रिय तारा है, जो हमेशा अंतरिक्ष में गैसें छोड़ता रहता है।
हर पल बाद यह लाखों टन मैटेरियल अंतरिक्ष की ओर उड़ेलता है। इसमें से कुछ हमारी धरती की ओर आता है हमारे वायुमंडल से टकराता है। जब यह मैटेरियल धरती के बाहरी वायुमंडल के संपर्क में आता है तो वायुमंडल में प्रकाश फैलाने का कारण बनता है।
क्या है ग्रहण? समय-समय पर चंद्रमा धरती के सामने आता रहता है। जब ऐसा होता है तो यह सूर्य से आने वाले प्रकाश का मार्ग रोक देता है। अगर यह सूर्य के प्रकाश को पूरी तरह ढक ले तो हम इसे पूर्ण ग्रहण कहते हैं और अगर यह कुछ हिस्सा ही ढकता है तो यह आंशिक ग्रहण कहलाता है।
आंशिक ग्रहण के दौरान हम चंद्रमा के पीछे सूर्य का कुछ हिस्सा देख सकते हैं, जबकि पूर्ण ग्रहण के दौरान सूर्य की बाहरी सतह या कोरोना को हम अपनी आंखों से देख सकते हैं, क्योंकि यह सूर्य के मुकाबले दस लाख गुणा कम मद्धम होता है, लेकिन तब भी हमें सावधानी बरतनी चाहिए।