मुंबई। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) का अनुमान है कि वर्ष 2009-10 के दौरान मुद्रास्फीति की औसत दर 0.1 प्रतिशत रहेगी। 2008-09 में मुद्रास्फीति की औसत दर 8.3 प्रतिशत रही थी।
सीएमआईई ने अपनी मासिक समीक्षा में कहा है कि 18 अप्रैल को समाप्त सप्ताह में थोक मूल्य सूचकांक 0.26 प्रतिशत के स्तर पर था तथा वित्त वर्ष 2009-10 के अधिकांश महीनों में इसके इसी स्तर के आसपास बने रहने की उम्मीद है। वर्ष के दौरान ईधन उत्पादों और विनिर्मित सामानों की कीमत में गिरावट दर्ज होने की उम्मीद है, जबकि प्राथमिक सामग्रियों की कीमतों में मजबूती बनी रहेगी।
भारतीय रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2009-10 के दौरान मुद्रा की आपूर्ति की वृद्धि दर कम रहने का अनुमान व्यक्त किया है। चालू वित्त वर्ष के दौरान क्षमता विस्तार जारी रहने का अनुमान है। इन सब कारणों से 2009-10 में मुद्रास्फीति की दर नीचे रहने का अनुमान लगाया गया है।
एक समूह के रूप में ईधन और बिजली की कीमत में छह प्रतिशत की गिरावट आने का अनुमान है, जबकि पिछले वित्त वर्ष में इसमें 7.4 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली थी। वर्ष के दौरान बिजली की कीमतों में तेजी आने की उम्मीद है लेकिन पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में गिरावट बिजली कीमतों में वृद्धि की कहीं अधिक भरपाई करेंगे।
सीएमआईई ने अपनी समीक्षा में कहा कि विनिर्मित वस्तुओं का थोक मूल्य सूचकांक चालू वित्त वर्ष के दौरान 0.5 प्रतिशत घटने का अनुमान है। यह 1955-56 के बाद की पहली गिरावट होगी जब विनिर्मित सामानों का थोक मूल्य सूचकांक 5.1 प्रतिशत घटा था।
इसमें कहा गया है कि विनिर्मित वस्तुओं का थोक मूल्य सूचकांक 5.1 प्रतिशत घटा है। हाल के वर्षों में विनिर्मित सामग्रियों की मुद्रास्फीति 1.8 प्रतिशत थी, जिसे वर्ष 2001-02 में दर्ज किया गया।
समीक्षा में कहा गया है कि विनिर्मित सामानों में कपड़ा, रबड़ और प्लास्टिक उत्पादों, रसायन और बेसिक धातुओं एवं धातु उत्पादों के थोक मूल्य सूचकांक में एक से 10.5 प्रतिशत की गिरावट आएगी। वस्त्र उत्पादों की कीमत में एक प्रतिशत की गिरावट आने का अनुमान है, जबकि बेसिक धातु समूहों की कीमत में 10.5 प्रतिशत तक की गिरावट आएगी।