मुंबई. शेयर बाजार में मुनाफावसूली और बिकवाली के कारण नरमी देखने को मिल रही है। सुबह 10.14 बजे बीएसई 105 प्वाइंट गिरकर 13955 पर कारोबार कर रहा है। जबकि निफ्टी 15.35 प्वाइंट की नरमी से 4254.95 प्वाइंट पर है।
शेयर बाजार में बुधवार को जोरदार बिकवाली के साथ मुनाफावसूली होने से जो नरमी बनी है, वह आज भी बनी हुई है। दूसरी ओर, वैश्विक बाजारों में नरमी का रुख बना हुआ है। जिसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिख रहा है।
अमेरिकी शेयर बाजारों में भी गिरावट देखने को मिली। फेडरल रिजर्व की ओर इकॉनामी की हालत पर निगेटिव रुख से कई शेयरों में बिकवाली रही। जिसका असर बाजार पर दिखा। फेडरल रिजर्व ने कहा है कि वर्ष 2009 में अमेरिका में बेरोजगारी बढ़ सकती है। डाओ जोंस 53 प्वाइंट गिरकर 8422 पर बंद हुआ। नैस्डेक 7 प्वाइंट की नरमी के साथ 1728 पर सिमटा। जबकि जापान का निक्केई इंडेक्स में 101 प्वाइंट की नरमी रही और यह 9235 से नीचे है।
भारतीय शेयर बाजार की बात करें तो बुधवार को रिलायंस इंडस्ट्रीज, आईसीआईसीआई बैंक, इंफोसिस, भारती एयरटेल, एचडीएफसी में मुनाफावसूली निकलने से सेंसेक्स में 241.37 अंकों की गिरावट दिखाई दी। बुधवार को बीएसई सेंसेक्स 14,230.73 अंकों के साथ खुलने के बाद 14,405.51 अंक तक चला गया था लेकिन बाद में 14,060.66 पर बंद हुआ। करीब 241.37 अंक की गिरावट सेंसेक्स में दिखाई दी है, जो 1.69 फीसदी थी। एनएसई निफ्टी 4318.75 पर खुलने के बाद 4362.85 की ऊंचाई तक गया और बाद में 4270.30 अंक पर बंद हुआ। यह करीब 1.11 फीसदी की गिरावट थी।
बाजार ने इन खबरों पर प्रतिक्रिया की है कि सरकार ने सौ दिन में सुधार कार्यक्रम तैयार किया है। कुछ देर मुनाफे में रहने के बाद सेंसेक्स में गिरावट दिखा रहा था। शेयर बाजार में उम्मीद की जा रही है कि सरकारी कंपनियों का विनिवेश किया जाएगा।
कहा जा रहा है कि उन कंपनियों की संख्या में इजाफा किया जा रहा है जिनमें सरकार अपनी हिस्सेदारी बेच सकती है। इनमें पावर ग्रिड कापरेरेशन, कोचीन शिपयार्ड और राष्ट्रीय इस्पात निगम जैसी कंपनियां शामिल हैं। जल्दी ही नई सरकार वित्तीय सुधारों को अंजाम देती दिखाई देगी। शेयर बाजार की नजर इस बात पर जरूर होगी कि बिजली मंत्रालय, परिवहन और शिक्षा जैसे मंत्रालय किसे मिलते हैं। बुनियादी ढांचे का विकास भी भारतीय अर्थव्यवस्था को गति देने वाला है। यह उम्मीद भी की जा रही है कि नई सरकार सब्सिडी व्यवस्था में सुधार की दिशा में कदम उठा सकती है। सरकार को राजकोषीय स्थिति सुधारनी होगी तभी वह विकास की गति बढ़ाने के लिए टैक्स में रियायतें दे सकेगी।