सीबीएसई टॉपर्स - दिमाग में छुपे हैं सफलता के राज
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सीबीएसई टॉपर्स - दिमाग में छुपे हैं सफलता के राज

इंदौर. टॉपर्स कैसे बनते हैं ? सीबीएसई 12वीं में जब शहर के 100 से अधिक बच्चों ने 90 प्रतिशत अंकों की छलांग लगाई तो ज्यादातर लोगों के मन में यही सवाल उठ रहा होगा। खासकर उनके मन में जो टॉपर बनने से चूक गए या भविष्य के टॉपर बनना चाहते हैं। इसी गुत्थी को सुलझाने के लिए भास्कर ने अलग-अलग विषयों के सात टॉपर्स को इंदौर दफ्तर में बुलाया और एमजीएम मेडिकल कॉलेज के मनोचिकित्सक डॉ. वी.एस. पाल एवं मनोविशेषज्ञ सुनीता गुप्ते से उनका इंटरेक्शन कराया, जिससे पता लगा कि उन स्टूडेंट्स में ऐसी क्या खासियत है, जिन्होंने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया।

मुझे घूमना अच्छा लगता है.. मैं स्नूकर चैम्पियन हूं.. मुझे छोटी बहन के साथ समय बिताना पसंद है और मैं तो मम्मी के साथ दिन-रात बातें करूं तो भी कम ही लगता है। आम बच्चों की तरह यह जवाब इस साल के 12वीं टॉपर्स के थे। सामान्य पढ़ाई थोड़ी मस्ती और दोस्तों के साथ गपशप इन सभी क्वालिटीज के साथ टॉपर्स में कुछ ऐसे गुण भी थे जिन्होंने उन्हें अव्वल बनाने में सहयोग किया।स्ट्रेस मैनेजमेंट जरूरी

टॉपर्स की कुछ आदतें और मैनेजमेंट इनके लिए गुड लक का काम करता है। डॉ. पाल बताते हैं अब स्टूडेंट्स के लिए बहुत सी फील्ड हैं, उन्हें स्कूल लेवल से प्रतियोगी परीक्षाओं की जानकारी होती है। यह भी इन्हें सफल बनाने में मुख्य कारण माना जा सकता है। श्रीमती गुप्ते कहती हैं टॉपर्स से बात करके बहुत अच्छा लगा इनके दिमाग में बहुत सी बातों को लेकर स्पष्टता है, जो इनके सक्सेस का मूलमंत्र हैं। वे कहती हैं हमने बहुत से ऐसे युवा भी देखे हैं, जो ऊंचे पदों पर होते हैं लेकिन स्ट्रेस उनके करियर को खत्म कर रहा है। हमारे टॉपर्स अभी से स्ट्रेस मैनेजमेंट को जीवन का हिस्सा बना चुके हैं। वे अपने लक्ष्य के प्रति बहुत साफ हैं। वे जानते हैं उन्हें किस समय क्या करना है। टॉपर्स के ऐसे बहुत से प्वॉइंट हैं, जिन्हें अपनाकर शहर के अन्य स्टूडेंट्स को भी फायदा हो सकता है। ये क्वालिटी बना सकती है आपको टॉपर

टाइम मैनेजमेंट

स्कूल, कोचिंग और अन्य काम के साथ घर में पढ़ाई के लिए टाइम मैनेज करना बहुत जरूरी है।

नियमित पढ़ाई

सेशन शुरू होते ही सालभर पढ़ाई करना एक टॉपर के लिए जरूरी है। इससे परीक्षा के समय अचानक लोड नहीं पड़ता है और कॉन्सेप्ट्स क्लीयर होते हैं।

अटेंशन

जिस विषय या टॉपिक को पढ़ रहे हैं उसमें अटेंशन जरूरी है। अटेंशन से एकाग्रता और याददाश्त का संबंध होता है।

फोक्सड

लक्ष्य के प्रति फोक्स्ड रहने से न सिर्फ समय की बचत होती बल्कि ऊर्जा की बचत भी होती है।

सेल्फ स्टडी

ग्रुप स्टडी टॉपर बनने का लक्षय रखने वालों के लिए काफी नहीं है। एकांत में सेल्फ स्टडी इन बच्चों के लिए जरूरी है।

चैनलाइज्ड

स्टूडेंट्स को अपनी दिनचर्या चैनलाइज्ड करना चाहिए, जिससे वह समय के महत्व को समझते हुए काम करें और एक काम का दूसरे पर प्रभाव न पड़े।

कॉन्फिडेंस

परीक्षा के समय घबराहट होना अच्छे लक्षण हैं लेकिन ज्यादा घबराहट, पसीना आना या रोना लूजर की निशानी है। कॉन्फिडेंस स्टूडेंट्स को बूस्ट करता है। इसी पर सारा दारोमदार है। भले याद हो लेकिन भरोसा न हो तो गड़बड़ हो सकती है।

सपोर्ट

स्टूडेंट्स को टीचर्स और पैरेंट्स का सपोर्ट मिलना बहुत जरूरी है। यह उनकी सक्सेस में बहुत ज्यादा मायने रखती है।

स्ट्रेस मैनेजमेंट

यह बात बहुत जरूरी है कि खुद को स्ट्रेस से दूर रखने के लिए अपनी हॉबीज को भी कैश करें। मनोरंजन करके खुद को रिचार्ज करना बेहद जरूरी।

रिस्पेक्ट

स्टूडेंट्स पढ़ाई में कितना भी अच्छा हो अगर वह टीचर्स, पैरेंट्स या अपने साथियों को रिस्पेक्ट नहीं देता तो उसे किसी भी स्टेज पर इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। सुपिरियटी कॉम्प्लेक्स स्टूडेंट्स की परफॉमेंस बिगाड़ता है।



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