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Baki Himachal Baki Himachal पालमपुर.
कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के वैज्ञानिक इन दिनों वैदिक मंत्रोच्चारण से खेती करने के अनूठे शोध में जुटे हुए हैं। इनका मानना है कि वह दिन दूर नहीं जब खेतों में लहलहाने वाली फसलें वैदिक मंत्रों से शुद्ध होंगी और उनमें कई बीमारियों को ठीक करने की खासियत भी होगी।
हरित क्रांति के नाम पर रासायनिक खेती के दुष्परिणामों से किसानों को निजात दिलाने के लिए कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के मॉडल ऑर्गेनिक फोम और एग्रो फॉरेस्ट्री विभाग के वैज्ञानिकों ने पुरातन पद्धति पर शोध कर इसमें कामयाबी हासिल की है।
सूर्योदय से शुरूआत: फसल की पैदावार के समय रोज सुबह सूर्योदय के साथ मंत्रोचारण होता है ताकि फसलों को नया जीवन और शुद्धि मिले, इसके बाद हवन कुंड में औषधीय जड़ी-बूटियों की आहूति दी जाती है। ब्राजील के जंगलों में केले की फसल तबाह होने के बाद वैज्ञानिकों ने सर्वप्रथम इस विधि का सफल प्रयोग किया था। कृषि वैज्ञानिक डॉ. वाईएस पाल के मुताबिक इससे जहां पर्यावरण शुद्ध होता है वहीं प्राकृतिक आपदाओं से भी निजात मिलती है।
विश्वविद्यालय के 20 वैज्ञानिक और चार छात्र आजकल इस विधि पर रिसर्च कर रहे हैं। यहां विभिन्न प्रकार के मंत्रों से वातावरण, मिट्टी, कीट, जानवरों और हवन कुंड की राख पर असर को डाटा के रूप में जमा किया जा रहा है। सुबह-सुबह कृषि विभाग के हॉल में मंत्रोचारण होता है। इसी शोध में भाग ले रही छात्रा रुचि शर्मा का कहना है कि यह किसी खास फसल के लिए नहीं बल्कि हर फसल के लिए लाभदायक है।