बल्लेवालां (छछरौली). बल्लेवालां गांव में यमुना नदी पर तटबंध बनाने को लेकर हरियाणा और यूपी के किसानों में ठन गई है। प्रदेश के करीब एक दर्जन गांवों के ग्रामीण यमुना तट पर डेरा डाले हुए हैं। वहीं यूपी के लोग यह कहकर तटबंध का विरोध कर रहे हैं कि इससे नदी की मुख्य धारा बाधित हो जाएगी। ऐसे में दोनों ओर से संगीनें तनीं हैं। इसी बीच गुरुवार को पुलिस और ग्रामीणों की देखरेख में तटबंध बनाने का काम शुरू कर दिया गया है। तटबंध बनाने पर अड़े ग्रामीणों ने यमुना तट पर टैंट लगा दिए हैं।
यहां आराम के साथ खाने-पीने के लिए लंगर की भी व्यवस्था है। हालात यह है कि हर घर के बड़े-बुजुर्र्गो ने यमुना तट पर मोर्चा संभाल लिया है और घर पर सिर्फ महिलाएं और बच्चे हैं। एक मिनट के लिए भी लोग इस जगह को नहीं छोड़ रहे।
तटबंध जरूरी : लाकड़ गांव के पूर्व सरपंच मुन्ना सिंह, शराब सिंह, बिंद्र आदि का कहना है कि भीलपूरा, लाकड़, मालीमाजरा, नवाजपुर, मंडौली गग्गड, बेलगढ़, मांडेवाला, मुजाहिदवाला, जयरामपुर, हलदरी, डांडीपुर आदि गांवों की स्थिति काफी खराब है।
यमुना में थोड़ा पानी आते ही ये गांव चपेट में आ जाते हैं। बारिश के मौसम में तो यहां के ग्रामीण तीन माह तक गांव में कैद हो जाते हैं। 2005 में तीन महीने तक उन्हें छछरौली अनाज मंडी में शरण लेनी पड़ी थी। बाढ़ ने सब कुछ तबाह कर दिया था। इस समस्या का एकमात्र समाधान तटबंध है जो उनकी काफी पुरानी मांग है।
अब उनकी मांग मानी गई तो यूपी के लोग इसमें अड़ंगा लगा रहे हैं लेकिन वे हर हाल में इसे बनाकर रहेंगे। तटबंध का निर्माण शुरू : सीमा पर तनाव का पता चलते ही यमुनानगर से पचास पुलिसकर्मी बिलासपुर डीएसपी के नेतृत्व में विवादित जगह पर भेजे गए हैं। पुलिस, तहसीलदार राजेंद्र सिंह व ग्रामीणों की पहरेदारी में तटबंध का काम शुरू हो गया।
यूपी को विश्वास में नहीं लिया
हर साल यहां हरियाणा और यूपी के लोग आमने-सामने होते हैं मगर कभी भी इस विवाद को गंभीरता से सुलझाने का प्रयास नहीं हुआ। आलम यह है कि तटबंध बनाने से पूर्व भी प्रशासन ने सहारनपुर प्रशासन से बातचीत नहीं की। नहर विभाग के एक्सईएन एके शर्मा का कहना है कि हमने इसकी जरूरत नहीं समझी।
फायदा क्या
यूपी ने अपनी ओर यमुना पर तटबंध बना लिया है। इससे यमुना का रुख हरियाणा की ओर हो गया है। हर वर्ष बाढ़ से हरियाणा के किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ता है। अगर तटबंध बन गया तो प्रदेश के किसानों को नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा।
बाढ़ ने सब कुछ तबाह कर दिया था। हर तरफ रेत ही रेत था। इस समस्या का एकमात्र समाधान तटबंध है जो उनकी काफी पुरानी मांग है। अब उनकी मांग मानी गई तो यूपी के लोग इसमें अड़ंगा लगा रहे हैं लेकिन वे हर हाल में इसे बनाकर रहेंगे।
तटबंध का निर्माण शुरू : सीमा पर तनाव का पता चलते ही यमुनानगर से पचास पुलिसकर्मी बिलासपुर डीएसपी के नेतृत्व में विवादित जगह पर भेजे गए हैं। पुलिस, तहसीलदार राजेंद्र सिंह व ग्रामीणों की पहरेदारी में तटबंध का काम शुरू हो गया।
यूपी को विश्वास में नहीं लिया
हर साल यहां हरियाणा और यूपी के लोग आमने-सामने होते हैं मगर कभी भी इस विवाद को गंभीरता से सुलझाने का प्रयास नहीं हुआ। आलम यह है कि तटबंध बनाने से पूर्व भी प्रशासन ने सहारनपुर प्रशासन से बातचीत नहीं की। नहर विभाग के एक्सईएन एके शर्मा का कहना है कि हमने इसकी जरूरत नहीं समझी।
फायदा क्या
यूपी ने अपनी ओर यमुना पर तटबंध बना लिया है। इससे यमुना का रुख हरियाणा की ओर हो गया है। अगर तटबंध बन गया तो हरियाण के लोगों को नुकसान नहीं होगा।