जुंडला (करनाल)
जानवरों के प्रति प्रेम अमूमन हर व्यक्ति के हृदय में होता है, लेकिन बिरले ही उसके लिए अपना जीवन तक समर्पित कर देते हैं। जुंडला के कृष्ण भी कुछ ऐसा ही कर रहे हैं। सुबह से लेकर रात तक अपना पूरा समय इन जानवरों के बीच बिताते हैं।
वे कहते हैं कि यदि ये निरीह प्राणी उनके साथी नहीं होते तो वे शायद अकेलापन महसूस करते। कृष्ण जब घर से निकलते हैं तो जानवरों की एक बड़ी फौज उनके आसपास होती है। पूरा दिन जानवरों की सेवा करने के बाद रिक्शा लेकर वे रात को घर पहुंचते हैं। अगले दिन फिर वहीं दिनचर्या।
नहीं की शादी :
कृष्ण के दिल में बचपन से ही जानवरों के प्रति गहरा लगाव है। बढ़ती उम्र के साथ वे बेजुबानों से जुड़ते गए। जब घरवालों ने शादी की बात की तो मुकर गए। उन्होंने कह दिया कि उनका उद्देश्य जीवों की सेवा करना है। उनके घर में बिल्ली, कुत्ता, बंदर, सूअर, चिड़िया, मुर्गे सहित करीब पंद्रह सदस्य रहते हैं। सैकड़ों आवारा पशु भी भोजन के लिए उनपर आश्रित हैं। वे घूम-घूमकर इनके लिए भोजन का इंतजाम करते हैं। खास बात यह कि हर जीव कतारबद्ध होकर खाना लेता है। यदि किसी जानवर ने गलती की तो वे थप्पड़ भी जड़ देते हैं।
जानवरों की भाषा समझते हैं : चालीस वर्षो से जानवरों के बीच रह रहे कृष्ण से परिजन भी नाता तोड़ चुके हैं। कृष्ण कई जानवरों की भाषा भी समझते हैं। जब वे बेजुबानों पर जुल्म की बात सुनते हैं तो गुस्से से भर जाते हंै। करीब आठ माह पहले पंचायत घर में रहने वालों बंदरों को जब कुछ लोगों ने डंडों से पीटा तो कृष्ण ने उनसे लड़ पड़े थे। उनके पास करीब सवा लाख रुपए थे जो जानवरों पर खर्च कर दिए।
कृष्ण जानवरों के इलाज के लिए मेरे पास आते हैं। जब तक इलाज पूरा नहीं हो जाता वे जानवरों की सेवा में लगे रहते हैं।
-इंद्र सिंह, वीएलडीए पशु चिकित्सालय जुंडला (करनाल)
अपने लिए तो सब कमाते हैं लेकिन कृष्ण निष्काम भाव से सेवा करते हैं। ऐसे लोगों के पुण्य कर्मो का फल पूरे समाज को प्राप्त होता है। पंचायत को उन पर गर्व है।
-उर्मिला देवी, सरपंच जुंडला