कैथल/सीवन.
‘सड़ मरांगे, लड़ मरांगे, पर गांव नहीं छोड़ेंगे। बच्च-बच्च शहीद होगा गांव नहीं छोड़ेंगे। असी सारे अपने आप नूं मिट्टी दा तेल पा के अग्ग ला लैंगे।’ यह पुकार गांव पोलड़ के उन बाशिंदों की है, जिनकी आंखों में घर से बेघर होने का खौफ साफ झलक रहा है। गुरुवार को आंखों में उम्मीद लिए सैकड़ों की संख्या में गांव पोलड़ निवासी लघु सचिवालय पहुंचे पर वहां उनकी सुनने वाला कोई नहीं था।
पुरातत्व विभाग के फतवे के बाद गांव के लोग लामबंद हो गए हैं। गांव को उजड़ने से बचाने के लिए सैकड़ों ग्रामीण महिलाएं और पुरुष सरकार तथा विभाग के खिलाफ नारेबाजी करते हुए ट्रैक्टर-ट्रालियों में डीसी ऑफिस कैथल पहुंचे। ग्रामीणों ने जाने से पूर्व एक बैठक कर गांव पर आई मुसीबत से निपटने के लिए एकजुट होने की कसम खाई और निर्णय किया कि गांव को किसी भी हालत में खाली नहीं करेंगे। इसके लिए उन्हें अगर जान भी देनी पड़ी तो पीछे नहीं हटेंगे।
ग्रामीणों ने कानूनी लड़ाई लड़ने और गांव को उजड़ने से बचाने के लिए पोलड़ बचाओ संघर्ष समिति का गठन किया है। इसमें 21 महिलाओं और पुरुषों का चयन किया गया है। डीसी को ज्ञापन देने जाने से पूर्व ग्रामीणों ने सरकार व विभाग के प्रति जमकर नारेबाजी की। ग्रामीण मुख्तयार सिंह, पोलड़ बचाओ संघर्ष समिति के प्रधान बचन सिंह, काबुल सिंह, राजकुमार, देवेंद्र सिंह, स्वर्ण, सुरत, विमल, नरेन्द्र कौर, गुरमीत कौर, दवेन्द्र , बचन , सरजीत, सुखदेव सिंह, बलदेव सिंह, श्रवण, रामप्रसाद ने कहा कि वे गांव को बचाने के लिए कुर्बानी देने को तैयार हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पुरातत्व विभाग के फरमान ने उनकी नींद उड़ा दी। चिंता है कि वह बच्चों को लेकर कहां जाएंगे।
सरपंच सतविन्द्रर कौर का कहना है कि इसके लिए वह सांसद नवीन जिंदल, मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मिलेंगे और अपील करेंगे कि गांव को किसी भी तरह उजड़ने से बचाएं। गुरुवार को ग्रामीण सांसद कार्यालय पर भी गए।