स्वाइन फीवर की दहशत
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स्वाइन फीवर की दहशत

swinसीकर/दांतारामगढ़. पचार गांव में शनिवार को सुअर मरने की सूचना के बाद लोगों में स्वाइन फ्लू की आशंका गहरा गई। इसे लेकर लोगों में दहशत फैल गई। सूचना मिलने पर पचार पहुंचे पशु चिकित्सकों ने मृत सुअरों का पोस्टमार्टम कर सैंपल लिए हैं। जिसकी जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। गांव के सुरेशकुमार ने बताया कि एक सप्ताह से सुअर मरने की घटनाएं शनिवार को अचानक बढ़ गईं।

इस वजह से ग्रामीण स्वाइन फीवर सहित अन्य गंभीर वायरल जनित बीमारी को लेकर आशंकित हो गए। टीम के साथ गए जिला रोग निदान प्रयोगशाला प्रभारी रसीद अहमद ने बताया कि मृत सुअरों के सैंपल लिए हैं, जिन्हें जांच के लिए जयपुर प्रयोगशाला भेजा जाएगा। गांव में 72 घंटे के दौरान आठ सुअर मरने की पुष्टि हुई। वहीं अन्य सुअर किसी बीमारी या वायरल से ग्रसित नहीं पाया गया।

उन्होंने बताया कि इससे पहले मंढा सुरेरा गांव में भी पास्ट्यूरेला इंफेक्शन के चलते एक दिन में करीब १क् सुअरों की मौत हो चुकी है। चिकित्सकों ने ग्रामीणों को से कहा कि इस बारे में कोई अफवाह नहीं फैलाएं। स्वाइन फ्लू और स्वाइन फीवर में बहुत अंतर होता है। स्वाइन फ्लू जानवर से व्यक्ति में फैलता है, जबकि स्वाइन फीवर सिर्फ सुअर तक ही सीमित रहता है।

स्वाइन फीवर में सुअर के मरने की दर बहुत तेज होती है, तो स्वाइन फ्लू में मौत के बजाय बीमार होने ग्राफ बढ़ता है। चिकित्सकों के दल में नोडल अधिकारी जेपी यादव, वरिष्ठ पशुचिकित्सा अधिकारी डा. सुमेरसिंह, पशुधन सहायक सुरेंद्रसिंह, हीरालाल शामिल थे।

स्वाइन फ्लू जैसी कोई शिकायत नहीं मिली है। कुछ मामलों स्वाइन फीवर मिला है। जिन पर टीकाकरण कर नियंत्रण कर लिया गया। पशुपालन विभाग को हर स्थिति पर नजर रखे हुए है। -भवानीसिंह, संयुक्त निदेशक पशुपालन विभाग जयपुर क्षेत्र



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