शिमला । हर साल आग में खाक हो रही करोड़ों रुपए की वन संपदा को बचाने के लिए वन विभाग रिमोट सेंसिग तकनीक और सेटेलाइट इमेजिंग की मदद लेगा। योजना को अंजाम तक पहुंचाने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, नेशनल इन्फॉरमेटिक सेंटर और वन विभाग मिलजुल कर काम करेंगे।
वन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अभय शुक्ला की अध्यक्षता में कुछ दिन पहले हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया। अधिकारियों की टीम गठित करने के निर्देश जारी किए गए हैं।
सूचना प्राद्यौगिकी विभाग के सचिव बीके अग्रवाल ने पुष्टि करते हुए बताया कि रिमोट सेंसिग तकनीक और सेटेलाइट इमेजिंग तकनीक दावानल की घटनाओं में कमी लाने में बेहद कारगर होगी। दोनों तकनीक की मदद से मुख्यालयों में बैठे-बैठे ही कंप्यूटर पर प्रदेश के वनों पर नजर रखी जा सकेगी।
इससे वन विभाग को आग लगने की जानकारी सही समय पर मिल सकेगी और समय पर उचित कदम उठाए जा सकेंगे। सेटेलाइट इमेजिंग तकनीक के माध्यम से वनों की हरियाली का ख्याल रखा जा सकेगा।
अगर कहीं पर भी वन किसी बीमारी या अन्य कारणों से सूख रहे हैं तो कंपरीहेंसिव डाटा इमेजिंग तकनीक से इसकी जानकारी ली जा सकती है।
हरित पट्टी के आवरण को बढ़ाने के लिए यह तकनीक कारगर रहेगी। इन माध्यमों से कैचमेंट एरिया प्लान पर भी वन विभाग नजर रख सकता है।