दिल्ली की पूरी टीम शायद पूछ रही होगी कि आखिर इस 37 वर्षीय खिलाड़ी में ऐसा क्या है, जिससे वह ऐसी धमाकेदार पारियां खेलता है। यह भी पूछा जा सकता है कि जब वे इतने ही अच्छे ढंग से खेल रहे थे, तो रिटायर क्यों हुए?
- गुगली
अमेरिका आईपीएल-2 के पहले सेमीफाइनल में जो कुछ हुआ, उसे देखते हुए तो कहना पड़ेगा कि टीमों को अपने असंदिग्ध विरोधी की क्रूरता के लिए पहले से ही तैयारी करनी होगी। दिल्ली डेयरडेविल्स के लिए डेक्कन चार्जर्स हैदराबाद के खिलाफ यह सेमीफाइनल मुकाबला काफी आसान माना जा रहा था।
इससे पहले लीग मैचों मंे दिल्ली लगातार अच्छा प्रदर्शन करती आ रही थी। तालिका में सबसे ऊपर भी वही थी। ऐसे में समझा जा रहा था कि हैदराबाद के विरुद्ध उसे कोई दिक्कत नहीं होगी। लेकिन दिल्ली ने जो सोचा भी नहीं था, वही हुआ। उन्हें इतनी करारी शिकस्त मिली कि उसे न तो उसके खिलाड़ी और न ही समर्थक आसानी से भुला पाएंगे।
ट्वेंटी-20 क्रिकेट में पहले भी रनों का अंबार लगा है, किसी एक बल्लेबाज द्वारा चौकों और छक्कों की पहले भी बारिश हुई है, लेकिन सेमीफाइनल मैच में जो पारी डेक्कन चार्जर्स के कप्तान एडम गिलक्रिस्ट ने खेली, वैसी प्रभावी पारी अगर किसी ने खेली होगी तो मुझे आश्चर्य होगा। गिलक्रिस्ट का खेलने का अंदाज ही निराला था। पहली गेंद से लेकर आउट होने तक उन्होंने जैसी बल्लेबाजी की, उससे ऐसा लग रहा था, मानो वे यह सोचकर ही आए हैं कि दिल्ली को सेमीफाइनल से बाहर करके ही दम लेना है।
गिलक्रिस्ट के कट्टर समर्थक बताएंगे कि ऐसा पहली बार नहीं है जब इस बल्लेबाज ने ऐसी धमाकेदारी पारी खेली कि फिर सामने वाली टीम को उससे उबरने का कोई मौका ही नहीं मिला। ऐसे कई उदाहरण मेरे सामने हैं। इनमें से एक वर्ष 2007 के विश्व कप फाइनल मैच का है जिसमें उन्होंने चमकदार सैकड़ा जमाया था।
वीरेंद्र सहवाग सहित दिल्ली की पूरी टीम शायद पूछ रही होगी कि आखिर इस 37 वर्षीय खिलाड़ी में ऐसा क्या है, जिससे वह ऐसी धमाकेदार पारियां खेलता है। यह भी पूछा जा सकता है कि जब वे इतने ही अच्छे ढंग से खेल रहे थे, तो फिर रिटायर क्यों हुए? इस सवाल की गूंज पूरी क्रिकेट दुनिया में सुनी जा सकती है।
इसमें कोई दो राय नहीं है कि पिछले साल रिटायर होने तक वे सबसे महान विकेटकीपर बल्लेबाज थे। इस टूर्नामेंट में वे जिस तरह से खेले हैं, उससे उन्होंने न केवल अपने खेल के स्तर को बनाए रखा है, बल्कि यह भी साफ होता है कि रिटायरमेंट की घोषणा उन्होंने काफी जल्दी में कर दी। उनमें अब भी इतना दम बचा है कि वे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कुछ समय तक और खेल सकते थे।
निश्चित तौर पर उनकी क्रिकेट प्रतिभा अक्षुण्ण बनी हुई है। गिलक्रिस्ट के शानदार खेल ने इस टूर्नामेंट में क्रिकेट के मैदान में होने वाली शानदार विडंबनाओं को भी चित्रित किया है। आखिर कौन सोच सकता था कि पिछले साल जो टीम अंक तालिका में सबसे नीचे थी, वह इस बार फाइनल खेलेगी?
गत वर्ष सातवें स्थान पर रहने वाली रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर टीम सेमीफाइनल में पहुंच जाएगी, इसका भी किसी को अनुमान नहीं था। इससे फिर साबित हो गया है कि क्रिकेट अनिश्चितताओं का खेल है।
लेखक डीएनए में एसोसिएट एडिटर हैं।