नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट अपनी उस टिप्पणी की समीक्षा कर सकती है, जिसमें कहा गया था कि मुस्लिम छात्रों के दाढ़ी रखने से देश के‘तालिबानीकरण’ को बढ़ावा मिलेगा। अपनी ताजा याचिका में छात्र सलीम ने पूर्व फैसले की समीक्षा का आग्रह किया है और शीर्ष कोर्ट की टिप्पणियों को भी चुनौती दी है।
याचिका के मुताबिक, मुस्लिमों के दाढ़ी रखने के मौलिक अधिकार को ‘तालिबानीकरण’ बताने संबंधी टिप्पणियों से मुस्लिम समुदाय की भावनाएं आहत हुई हैं। इसके अलावा देश व न्यायपालिका की छवि को काफी नुकसान पहुंचा है।
सलीम ने अपने वकील अब्दुल करीम अंसारी के मार्फत दायर याचिका में कहा है कि फैसले की फिर समीक्षा की इसलिए जरूरत है, क्योंकि स्कूल ने संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत मुस्लिमों को मिले दाढ़ी रखने के अधिकार की गारंटी का उल्लंघन किया है। यह अनुच्छेद प्रत्येक नागरिक को अपने मजहब के पालन की आजादी देता है।
इससे पहले, मध्यप्रदेश स्थित निर्मला कान्वेंट हायर सेकेंडरी स्कूल के छात्र सलीम ने स्कूल के उस नियम को चुनौती दी थी, जिसमें छात्रों को दाढ़ी रखने की मनाही की गई थी। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट द्वारा नियम की वैधता बरकरार रखने के बाद उसने शीर्ष कोर्ट में अपील की थी। शीर्ष कोर्ट ने उसकी याचिका खारिज की थी।
याचिकाकर्ता के वकील ने अनुरोध किया है कि इस याचिका को वायुसेना कर्मी द्वारा दायर याचिका से जोड़ा जाए। इस वायुसेना कर्मी ने अधिकारियों द्वारा दाढ़ी रखने की मनाही संबंधी अधिसूचना को चुनौती दी है।
सुप्रीम कोर्ट की अवकाशकालीन बेंच सलीम की याचिका पर संभवत: सोमवार को सुनवाई करेगी। इस बेंच पूर्व फैसले के दौरान टिप्पणी करने वाले जस्टिस मरकडेय काटजू भी शामिल हैं।